Consumer Brands: ₹40,000 करोड़ के मार्केट पर कब्ज़ा करने के लिए अपनाई 'Risqué' रणनीति

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AuthorAditya Rao|Published at:
Consumer Brands: ₹40,000 करोड़ के मार्केट पर कब्ज़ा करने के लिए अपनाई 'Risqué' रणनीति

IndoBevs और UNDRESS जैसे भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स अब विज्ञापन से हटकर अपने प्रोडक्ट डिजाइन में ही 'प्रोवोकेशन' (provocation) का तड़का लगा रहे हैं। ₹40,000 करोड़ के लाइफस्टाइल सेगमेंट को टारगेट कर रहे इस मॉडल में कमाई तो तेज है, लेकिन ब्रांड सस्टेनेबिलिटी और रेगुलेटरी रिस्क बड़े सवाल हैं।

भारतीय कंज्यूमर ब्रांड्स अब 'Risqué 2.0' रणनीति के साथ बाजार में उतर रहे हैं। यहाँ बोल्ड ब्रांडिंग सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीधे प्रोडक्ट के डिजाइन और खरीदारी के अनुभव में शामिल किया जा रहा है। सेक्सुअल वेलनेस, इंटीमेटवियर और रेडी-टू-ड्रिंक अल्कोहल जैसे सेक्टर्स में कंपनियां ₹38,300 करोड़ से ₹44,000 करोड़ के बीच के बाजार पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।

नई रणनीति का जाल

IndoBevs, जो अपने ब्रांड 'BroCode' के लिए मशहूर है, अब सेक्सुअल वेलनेस कैटेगरी में 'BroTection' कंडोम के साथ उतर चुका है। वहीं, नया D2C ब्रांड UNDRESS प्रीमियम मेन्स इंटीमेटवियर सेगमेंट में आ गया है। ये कंपनियां प्रीमियम प्राइसिंग अपना रही हैं, जहां UNDRESS के प्रोडक्ट्स की कीमत ₹799 से लेकर ₹1,399 तक है, ताकि इन्हें एक बेसिक कमोडिटी के बजाय लाइफस्टाइल की जरूरत के तौर पर पेश किया जा सके।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और रिस्क

यह पूरा बिजनेस मॉडल D2C और सोशल मीडिया पर आधारित है। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के जरिए ये ब्रांड्स सीधे कंज्यूमर तक पहुंच रहे हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि 'शॉक वैल्यू' की एक एक्सपायरी डेट होती है। अगर प्रोडक्ट की क्वालिटी मार्केटिंग के मुकाबले कमजोर रही, तो कस्टमर्स दोबारा नहीं लौटेंगे। इसके अलावा, 70-80% रेवेन्यू के लिए सोशल मीडिया पर निर्भरता मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।

रेगुलेटरी और मार्केट रिस्क

इन ब्रांड्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती रेगुलेटरी स्क्रूटनी की है। अल्कोहल और वेलनेस के बीच की धुंधली रेखा सरकारी अधिकारियों का ध्यान खींच सकती है। साथ ही, छोटे शहरों के कंज्यूमर्स को जोड़ने में आ रही दिक्कतें इस मार्केट के विस्तार को सीमित कर सकती हैं। आने वाले समय में इन कंपनियों के लिए असली परीक्षा मार्केटिंग से हटकर ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी (operational profitability) और ब्रांड लॉयल्टी साबित करने की होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.