Coca-Cola द्वारा **$5.1 बिलियन** में खरीदी गई Costa Coffee के लिए राह आसान नहीं है। 8 साल बीतने के बाद भी कंपनी अपने कॉफी बिजनेस को उम्मीद के मुताबिक स्केल करने और मुनाफे को स्थिर करने के लिए जूझ रही है।
बिजनेस मॉडल में बड़ी चूक
Coca-Cola की मुख्य ताकत उसकी कोल्ड-बेवरेज बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है। समस्या यह है कि कॉफी एक 'हाई-टच' रिटेल बिजनेस है, जिसमें डेली मेंटेनेंस और फ्रेश सामग्री की जरूरत होती है। Coca-Cola के पुराने सेटअप के साथ इस नए मॉडल को फिट करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ है। हालांकि कंपनी ने अपने Costa Express मशीनों की संख्या को 8,200 से बढ़ाकर 15,000 के पार जरूर किया है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर जो रफ्तार कंपनी ने सोची थी, वह नहीं मिल सकी।
अमेरिकी बाजार में चुनौतियां
UK के मुकाबले अमेरिका में Costa को पैर जमाने में पसीना छूट रहा है। वहां Starbucks जैसे दिग्गज पहले से मौजूद हैं। साथ ही, McDonald’s के साथ Coca-Cola की पुरानी और मजबूत पार्टनरशिप भी एक बाधा बन गई, क्योंकि McDonald’s खुद कॉफी सेगमेंट में बहुत बड़ा नाम है, जिससे Coca-Cola को अपने रिटेल विस्तार में फूंक-फूंक कर कदम रखने पड़ रहे हैं।
फाइनेंशियल रिपोर्ट क्या कहती है?
साल 2025 में Costa Coffee का रेवेन्यू £1.29 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 5% की ग्रोथ है। कंपनी ने पिछले साल के £13.5 मिलियन के घाटे से निकलकर £20.4 मिलियन का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि यह मुनाफा बिजनेस बढ़ने के बजाय 18% कर्मचारियों की छंटनी और बड़े पैमाने पर लागत में कटौती (Cost-cutting) करने की वजह से आया है।
इन्वेस्टर्स के लिए अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनी बिना और छंटनी किए इस मुनाफे को बरकरार रख पाएगी। फिलहाल Coca-Cola ने इसे बेचने की खबरों को खारिज कर दिया है, लेकिन यह डील इस बात का बड़ा उदाहरण है कि अलग इंडस्ट्री में डाइवर्सिफिकेशन करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
