Coca-Cola के CEO Henrique Braun ने साफ कर दिया है कि कंपनी भारत में सस्ती ड्रिंक्स के मुकाबले कीमतों में कटौती नहीं करेगी। Reliance Industries की Campa Cola के **6-7%** मार्केट शेयर पर कब्जा करने के बाद भी, Coca-Cola ब्रांड लॉयल्टी और डिस्ट्रीब्यूशन पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखेगी।
प्राइस वॉर को बताया 'अतार्किक'
Barclays Global Consumer Staples Conference के दौरान CEO Henrique Braun ने साफ शब्दों में कहा कि वे प्रतिस्पर्धियों की प्राइसिंग स्ट्रैटेजी में नहीं फंसेंगे, जिसे उन्होंने 'अतार्किक' (irrational) करार दिया। बाजार में मौजूद ₹10 और ₹20 वाले सस्ते प्रोडक्ट्स के जवाब में दाम कम करने के बजाय, कंपनी अपने मार्जिन को बचाने के लिए ब्रांड स्ट्रेंथ और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
Campa Cola का तेजी से बढ़ता दबदबा
Reliance Industries द्वारा रिलॉन्च की गई Campa Cola ने भारतीय मार्केट में खलबली मचा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, कम कीमत के दम पर नए खिलाड़ियों ने FY26 में 6-7% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है, जो कि FY24 में महज 2% था। Reliance ने बताया कि Campa Cola की ग्रॉस सेल्स ₹4,700 करोड़ के पार पहुंच गई है, जिससे यह देश का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड बन गया है।
Coca-Cola की रणनीति और फाइनेंशियल सेहत
कंपनी ने अपनी 'रेवेन्यू-ग्रोथ मैनेजमेंट' क्षमता पर भरोसा जताया है। वैश्विक स्तर पर स्थिति मजबूत है; दूसरी तिमाही में नेट रेवेन्यू 7% बढ़कर $13.4 बिलियन दर्ज किया गया। NYSE पर कंपनी का शेयर $87.84 के आसपास ट्रेड कर रहा है।
हालांकि, भारत में जोखिम बना हुआ है। यदि प्राइस गैप बहुत ज्यादा बढ़ता है, तो बजट-सचेत ग्राहक सस्ते विकल्पों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या 'ब्रांड-फर्स्ट' अप्रोच कंपनी के वॉल्यूम ग्रोथ को गिरने से बचा पाएगी या फिर मार्केटिंग पर बढ़ते खर्चों से मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।
