Citi Research ने Page Industries पर अपना भरोसा जताया है। ब्रोकरेज ने स्टॉक को 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹47,700 तय किया है। उम्मीद है कि अगले साल कंपनी के वॉल्यूम ग्रोथ में सुधार होगा और इन्वेंटरी का स्तर कम होगा, जो ऑपरेशनल रिकवरी का संकेत दे रहा है।
क्या हुआ?
Citi Research ने भारत में Jockey ब्रांड की निर्माता कंपनी Page Industries के प्रति अपना नजरिया बदला है। ब्रोकरेज ने इस स्टॉक को पहले की 'Sell' पोजीशन से ऊपर उठाकर 'Buy' रेटिंग दे दी है। इसके साथ ही, टारगेट प्राइस को पिछले अनुमान ₹34,100 से बढ़ाकर ₹47,700 कर दिया गया है।
निवेशकों के लिए यह क्यों मायने रखता है?
स्टॉक को अपग्रेड करने का फैसला इस उम्मीद पर आधारित है कि Page Industries ने अपने सबसे मुश्किल ऑपरेशनल चुनौतियों को पार कर लिया है। Citi के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 तक कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ में 9.6% की वृद्धि होगी। इस आशावाद के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं। पहला, कंपनी ने इस साल अब तक लगभग 4.5% की प्राइस हाइक लागू की है, जिससे रेवेन्यू को सहारा मिलने की उम्मीद है। दूसरा, कंपनी बेहतर प्रोडक्ट मिक्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रोकरेज का अनुमान है कि उत्पादों का बिक्री चैनल में इन्वेंटरी टाइम (inventory) 60-65 दिनों से घटकर लगभग 40 दिनों तक आ जाएगा। तेज इन्वेंटरी टर्नओवर आम तौर पर कंपनियों को कैश को अधिक कुशलता से मैनेज करने में मदद करता है और मजबूत बिक्री की गति को बढ़ा सकता है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस का रिव्यू
31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में, Page Industries ने ₹178.73 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9% अधिक है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में भी 14% की वृद्धि देखी गई, जो ₹1,252.6 करोड़ रहा। सेल्स वॉल्यूम, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मीट्रिक है, 10.8% बढ़कर 54.5 मिलियन पीस तक पहुंच गया।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी ने ₹5,310.67 करोड़ की कुल आय पर ₹763.82 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। ये आंकड़े एक स्थिर प्रदर्शन का संकेत देते हैं, लेकिन कंपनी लागत के दबाव से भी जूझ रही है।
रिस्क और लागत दबाव
हालांकि ग्रोथ का आउटलुक सकारात्मक लग रहा है, निवेशकों को खर्चों के प्रति सचेत रहना चाहिए। मार्च तिमाही में, कुल खर्च 14.72% बढ़कर ₹1,031.96 करोड़ हो गया। इसका एक प्रमुख कारण इनपुट लागतों में लगातार महंगाई है, खासकर कॉटन की कीमतों में, जो अपैरल निर्माताओं के लिए एक प्राथमिक कच्चा माल है। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया है कि वे इन बढ़ी हुई लागतों को मैनेज करने के लिए सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन और सावधानीपूर्वक प्राइसिंग जैसी रणनीतियों का उपयोग कर रहे हैं।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
शेयरधारकों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु आने वाली तिमाहियों में वास्तविक वॉल्यूम ग्रोथ होगी, यह देखने के लिए कि क्या यह 9.6% के अनुमान से मेल खाती है। इसके अतिरिक्त, निवेशक इन्वेंटरी लेवल पर अपडेट देखना चाह सकते हैं ताकि यह पुष्टि हो सके कि कंपनी ने माल के चैनल में रहने की अवधि को सफलतापूर्वक कम किया है या नहीं। अंत में, कॉटन की कीमतों में बदलाव एक महत्वपूर्ण कारक होगा, क्योंकि कोई भी तेज वृद्धि प्रॉफिट मार्जिन पर फिर से दबाव डाल सकती है।
