मुनाफे में भारी सेंध, रेवेन्यू पर दबाव
Cello World के Q3 FY26 के नतीजे काफी निराशाजनक रहे, जिसने कंपनी की ग्रोथ स्टोरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू साल-दर-साल 1% घटकर ₹553.7 करोड़ रहा। सबसे चिंता की बात यह है कि EBITDA में 12% की गिरावट आई और यह ₹122.3 करोड़ पर आ गया। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) में तो 26% की बड़ी सेंध लगी और यह सिर्फ ₹63.6 करोड़ रह गया।
मुनाफे में यह भारी गिरावट, जबकि रेवेन्यू में सिर्फ थोड़ी कमी आई, यह दिखाती है कि कंपनी को या तो लागत (Cost) बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है या फिर कंपनी का प्रोडक्ट मिक्स (Product Mix) उतना फायदेमंद नहीं रहा। ये नतीजे पिछली उम्मीदों से बिल्कुल उलट हैं, जो मांग बढ़ने और कंपनी के बेहतर प्रदर्शन का संकेत दे रहे थे। ऐसा लगता है कि बाजार के मौजूदा हालात और गलाकाट प्रतिस्पर्धा (Cut-throat Competition) उम्मीद से कहीं ज्यादा हावी हैं।
ब्रोकरेज की राय और भविष्य की उम्मीदें
इस खराब प्रदर्शन के बावजूद, ICICI Securities ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन अपने नजरिए को काफी बदला है। उन्होंने Cello World के शेयर का टारगेट प्राइस 14% घटाकर ₹700 से ₹600 कर दिया है। यह नया टारगेट FY28 की कमाई के 30x P/E मल्टीपल पर आधारित है। पिछली रिपोर्टों में इसी ब्रोकरेज फर्म ने ₹1,050 तक का टारगेट दिया था, जो तब के ऊंचे P/E मल्टीपल को दर्शाता है।
ब्रोकरेज की उम्मीदें कंपनी के आने वाले प्रोजेक्ट्स पर टिकी हैं। इसमें Q4 FY26 में शुरू होने वाली स्टील प्रोडक्ट्स (Steel Products) बनाने वाली नई फैक्ट्री शामिल है, जिससे FY27-28 तक लागत कम होने और स्टील सेगमेंट में मार्केट शेयर बढ़ाने की उम्मीद है। इसके अलावा, राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स (Writing Instruments) सेगमेंट में Cello ब्रांड के अधिग्रहण (Acquisition) के बढ़ने से भी FY28 तक ग्रोथ को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल, कंपनी की मार्केट कैप (Market Cap) करीब ₹10,000 करोड़ है और P/E रेश्यो लगभग 30-33x के आसपास बना हुआ है। अगर हम Peers से तुलना करें, तो Cello World का P/E रेश्यो कुछ हद तक ज्यादा लगता है। उदाहरण के लिए, La Opala RG का P/E 16x से 24x के बीच है, जबकि Borosil Ltd. का P/E करीब 40-41x है। TTK Prestige तो इससे भी काफी ऊपर 55x से 90x से ज्यादा मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है।
Cello World जिस स्टील सेक्टर में उतर रहा है, वहां अच्छी ग्रोथ का अनुमान है। भारत के स्टील प्रोडक्ट्स मार्केट में 2031 तक 5.4% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है, और कुल स्टील मार्केट में 2026-2031 तक वॉल्यूम के हिसाब से 9.12% CAGR की उम्मीद है। स्टेशनरी मार्केट, जो कंपनी का मुख्य सेगमेंट है, में भी 2030 तक 5.64% CAGR की ग्रोथ संभव है, जिसका कारण शिक्षा और कॉर्पोरेट डिमांड है। लेकिन, कंपनी के हालिया नतीजों और टारगेट प्राइस में इतनी बड़ी कटौती यह बताती है कि ये सेक्टर की अच्छी हवाएं अभी Cello World के नतीजों में तब्दील नहीं हो पा रही हैं।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
लगातार रेवेन्यू में आ रही कमी और Q3 FY26 में मुनाफे में आई तेज गिरावट यह संकेत देते हैं कि कंपनी के सामने कुछ ऐसी मुश्किलें हैं जो आने वाली ग्रोथ की योजनाओं पर भारी पड़ रही हैं। Mid-2024 में ₹1,000 से ऊपर के टारगेट से अब ₹600 तक की भारी कटौती, विश्लेषकों द्वारा कंपनी की एग्जीक्यूशन (Execution) क्षमता और निवेश को वास्तविक टॉप-लाइन ग्रोथ में बदलने की काबिलियत को लेकर एक बड़े पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) को दिखाती है। पिछले एक साल में शेयर का खराब प्रदर्शन (करीब 11% से 18% की गिरावट) निवेशकों के भरोसे की कमी को दर्शाता है।
हालांकि Cello World को कंज्यूमरवेयर (Consumerware) में ब्रांड पहचान का फायदा है और यह स्टील प्रोडक्ट्स और राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स में विस्तार करना चाहती है, इसका P/E कुछ डायरेक्ट Competitors जैसे La Opala RG की तुलना में ऊंचा बना हुआ है, जो कि एक संबंधित सेगमेंट में होने के बावजूद काफी कम मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। स्टेशनरी मार्केट में भी ग्रोथ की संभावना है, लेकिन चीन जैसे देशों से इंपोर्ट (Import) की बढ़ती प्रतिस्पर्धा डोमेस्टिक कंपनियों पर प्राइसिंग प्रेशर (Pricing Pressure) डाल सकती है।
ICICI Securities का अनुमान है कि FY26–28E अवधि में रेवेन्यू और PAT में क्रमशः 12.5% और 17.1% की CAGR ग्रोथ होगी, और Return on Capital Employed (RoCE) लागत से ऊपर बना रहेगा। ये अनुमान स्टील प्रोडक्ट्स फैक्ट्री के सफल चालू होने और राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स पोर्टफोलियो में Cello ब्रांड के एकीकरण (Integration) पर निर्भर करते हैं। हालांकि, तत्काल वित्तीय स्थिति और वैल्यूएशन में हुई भारी गिरावट यह बताती है कि इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए एग्जीक्यूशन और बाजार की स्थितियों में एक बड़े सुधार की आवश्यकता होगी।
