Caratlane ने FY26 में ₹4,690 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल से **18%** ज्यादा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डायमंड कंज्यूमर बन गया है, और कंपनी अपनी रिटेल मौजूदगी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही है।
डायमंड ज्वैलरी की बढ़ी डिमांड, भारत बना दूसरा बड़ा बाज़ार!
भारतीय रिटेल ज्वैलरी मार्केट में ग्राहकों की पसंद बदल रही है। अब सिर्फ सोने की नहीं, बल्कि डायमंड ज्वैलरी की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डायमंड कंज्यूमर बन गया है, जो ग्लोबल मार्केट का 12% हिस्सा रखता है। लोग अब ज्वैलरी को सिर्फ निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल और खूबसूरती के लिए खरीद रहे हैं।
Caratlane का शानदार प्रदर्शन
इस बदलते माहौल का फायदा उठाते हुए, Caratlane ने मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹4,690 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है। यह पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी है। कंपनी के कुल रेवेन्यू का 90% से ज़्यादा हिस्सा नेचुरल डायमंड की बिक्री से आता है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, कंपनी ने चेन्नई में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की प्रोडक्शन क्षमता को तीन गुना कर दिया है।
रिटेल नेटवर्क का विस्तार
Caratlane के फिलहाल 381 रिटेल स्टोर हैं, जो 160 से ज़्यादा शहरों में फैले हुए हैं। ऑनलाइन बिक्री भी हो रही है, लेकिन कंपनी की ज्यादातर बिक्री फिजिकल स्टोर से ही होती है। कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल नेटवर्क को बढ़ाकर भारत के बड़े लेकिन कम एक्सप्लोर किए गए डायमंड ज्वैलरी मार्केट में अपनी पैठ बनाना चाहती है। अभी देश में डायमंड ज्वैलरी का मार्केट पेनिट्रेशन सिर्फ 10% से 12% है, जिससे ऑर्गेनाइज्ड रिटेलर्स के लिए आगे ग्रोथ की काफी गुंजाइश है।
युवा पीढ़ी की पसंद
पहले जहां लोग महंगाई से बचने के लिए सोना खरीदते थे, वहीं अब युवा पीढ़ी अपनी खुशी के लिए छोटे डायमंड वाले पीस खरीद रही है। Caratlane ने इस ट्रेंड को देखते हुए अपने प्रोडक्ट रेंज को भी बढ़ाया है, जिसमें कम कैरेट वाले कलेक्शन और Shaya ब्रांड के तहत सिल्वर-बेस्ड डायमंड ज्वैलरी भी शामिल है।
भारत के ज्वैलरी सेक्टर का कुल मार्केट साइज $80 अरब से $90 अरब के बीच है। इस सेक्टर में पुरानी ज्वैलरी दुकानों और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल चेन के बीच कड़ी टक्कर जारी है। डायमंड की बढ़ती खपत इस सेक्टर के लिए अच्छी खबर है, लेकिन कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी कच्चे माल की लागत को मैनेज करने और बदलते ग्राहक की पसंद के बीच मार्जिन बनाए रखने पर निर्भर करेगी। इन्वेस्टर्स कंपनी की चेन्नई यूनिट के इस्तेमाल, स्टोर बढ़ाने के टारगेट और आने वाली तिमाहियों में रेवेन्यू ग्रोथ बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखेंगे।
