हैदराबाद की जानी-मानी कैफे चेन Cafe Niloufer अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए फंड जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की पेरेंट फर्म ABR Cafe & Bakers ने इस प्रोसेस के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ली है। यह कदम फूड सर्विसेज सेक्टर में कंपनी की ग्रोथ को दिखाता है।
ABR Cafe & Bakers कर रही फंड जुटाने की कोशिश
Cafe Niloufer की पेरेंट कंपनी, ABR Cafe & Bakers Pvt. Ltd, फिलहाल बाहरी निवेशकों से कैपिटल जुटाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। कंपनी ने पोटेंशियल फंडरेज़िंग प्रोसेस को मैनेज करने के लिए PwC और The Rainmaker Group को हायर किया है। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है जब भारतीय फूड सर्विसेज इंडस्ट्री में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ रही है, खासकर ऑर्गेनाइज्ड डाइनिंग और रिटेल चेन्स में।
फाइनेंसियल ग्रोथ और मुनाफा
हाल के दिनों में कंपनी ने अपने बिजनेस ऑपरेशन्स में दमदार ग्रोथ दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2025 के अंत तक, Cafe Niloufer ने ₹205.7 करोड़ का ऑपरेटिंग इनकम दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹140.1 करोड़ से काफी ज्यादा है। रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹7.8 करोड़ रहा, जो FY24 के ₹6.5 करोड़ से थोड़ा ऊपर है। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी एक्सपेंशन पर खर्च करते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बेहतर बनाती है, क्योंकि फिलहाल नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग 3.8% है, जो कि काफी कम माना जाता है।
वैल्यूएशन का अनुमान
हालांकि फंडरेज़िंग की प्रोसेस अभी पूरी नहीं हुई है, शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का वैल्यूएशन ₹1,500 करोड़ से ₹1,800 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है। प्राइवेट कंपनी फंडिंग के मामले में, यह वैल्यूएशन अक्सर मौजूदा प्रॉफिट के बजाय कंपनी की फ्यूचर ग्रोथ पोटेंशियल पर आधारित होता है। निवेशक आमतौर पर रेवेन्यू मल्टीपल्स और अपने आउटलेट्स व रिटेल प्रोडक्ट्स (जैसे टी ब्लेंड्स और बेकरी आइटम्स) को नए मार्केट्स में स्केल करने की क्षमता के आधार पर ऐसे वैल्यूएशन का आकलन करते हैं।
सेक्टर और ऑपरेशनल रिस्क
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Cafe Niloufer एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है। इसका मतलब है कि यह NSE या BSE जैसे स्टॉक एक्सचेंजों पर ट्रेड नहीं करती है, और रिटेल निवेशक इसके शेयर सीधे नहीं खरीद सकते। ऑर्गेनाइज्ड फूड सर्विसेज सेक्टर के कई प्लेयर्स की तरह, यह कंपनी भी एक हाईली कंपिटिटिव माहौल में ऑपरेट करती है। सफलता लगातार फूड क्वालिटी बनाए रखने, रॉ मटेरियल की बढ़ती लागतों को मैनेज करने और फिजिकल रिटेल प्रेजेंस को स्केल करने की जटिलताओं को नेविगेट करने पर निर्भर करती है। फूड एंड बेवरेज सेक्टर में अक्सर बदलते कंज्यूमर टेस्ट और बड़े शहरों में रियल एस्टेट की ऊंची लागत से जुड़े रिस्क होते हैं। इस फंडरेज़िंग एफर्ट का फाइनल रिजल्ट मार्केट कंडीशंस और संभावित निवेशकों द्वारा की जाने वाली ड्यू डिलिजेंस पर निर्भर करेगा।
