Bruno Milano: घड़ियों के इस ब्रांड ने जुटाए ₹7.5 करोड़, अब करेगी बड़ीThe Brand Expansion!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bruno Milano: घड़ियों के इस ब्रांड ने जुटाए ₹7.5 करोड़, अब करेगी बड़ीThe Brand Expansion!

नोएडा की D2C वॉच कंपनी Bruno Milano ने निवेशकों का भरोसा जीत लिया है! कंपनी ने Sauce VC के नेतृत्व में ₹7.5 करोड़ की फंडिंग हासिल की है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ऑपरेशंस को बढ़ाने और नए डिज़ाइन कलेक्शन लॉन्च करने में करेगी। यह कदम भारत के खास, डिजाइन-केंद्रित वॉच मार्केट में बढ़ते निवेशक इंटरेस्ट को दिखाता है।

Bruno Milano ने क्यों जुटाई मोटी रकम?

Bruno Milano, जो कि एक अर्ली-स्टेज डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) वॉच ब्रांड है, ने हाल ही में ₹7.5 करोड़ की फंडिंग सफलतापूर्वक पूरी की है। इस राउंड का नेतृत्व प्रमुख वेंचर कैपिटल फर्म Sauce VC ने किया। खास बात यह है कि इस इन्वेस्टमेंट में Titan Capital और रोमन सैनी जैसे कई एंजेल इन्वेस्टर्स का भी योगदान रहा।

साल 2024 में इंडस्ट्री के अनुभवी Rachit Jain और Saurabh Agarwal द्वारा स्थापित, नोएडा स्थित इस स्टार्टअप का लक्ष्य इस कैपिटल का उपयोग पूरे भारत में अपनी पहुंच का विस्तार करना है। साथ ही, कंपनी हर तिमाही में नए वॉच डिज़ाइन पेश करेगी और मेजर ई-कॉमर्स व क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मौजूदगी को मजबूत करेगी।

भारतीय वॉच मार्केट में Bruno Milano की जगह?

भारत में D2C वॉच मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नए ब्रांड्स उन कंज्यूमर्स को टारगेट कर रहे हैं जो खास डिजाइन की तलाश में हैं, लेकिन पारंपरिक लग्जरी ब्रांड्स की ऊंची कीमतों से बचना चाहते हैं। Bruno Milano खुद को ₹2,000 से ₹5,000 के प्राइस सेगमेंट में पोजिशन कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य लो-कॉस्ट मास-मार्केट घड़ियों और हाई-एंड लग्जरी टाइमपीस के बीच के गैप को भरना है। अपने Vittorio और Duomo जैसे डिजाइन-फॉरवर्ड कलेक्शन पर ध्यान केंद्रित करके, ब्रांड मेट्रो और टियर-2 शहरों के उन ग्राहकों को टारगेट कर रहा है जो ग्लोबल स्टाइल ट्रेंड्स के बारे में तेजी से जागरूक हो रहे हैं।

कॉम्पिटिशन और आगे की राह

भारत का वॉच सेक्टर काफी कॉम्पिटिटिव है। इसमें स्थापित बड़ी कंपनियों के साथ-साथ Bangalore Watch Company और Jaipur Watch Company जैसे कई उभरते हुए स्टार्टअप्स भी शामिल हैं। Bruno Milano जैसी युवा कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी को लागू करते हुए प्रोडक्ट की क्वालिटी बनाए रखना है। एक्सपेंशन पर खर्च करते हुए सप्लाई चेन को मैनेज करने और लागतों को कंट्रोल करने की क्षमता कंपनी के लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी के लिए क्रिटिकल होगी।

चूंकि यह एक प्राइवेट कंपनी है, इसे लिस्टेड वॉचमेकर्स की तरह पब्लिक मार्केट की स्क्रूटनी का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि, बिजनेस को अर्ली-स्टेज कंज्यूमर स्टार्टअप्स के सामान्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि मार्केट शेयर के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा और नए डिजाइनों की डिमांड को लगातार साबित करने की जरूरत। जैसे-जैसे ब्रांड स्केल करेगा, स्टेकहोल्डर्स संभवतः ई-कॉमर्स लैंडस्केप की हाई मार्केटिंग और एक्विजिशन कॉस्ट्स को नेविगेट करते हुए प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे। आने वाले तिमाही प्रोडक्ट लॉन्च यह टेस्ट करेंगे कि क्या कंपनी भीड़ भरे बाजार में कंज्यूमर इंटरेस्ट को सफलतापूर्वक बनाए रख पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.