Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने Britannia Industries पर **₹1 लाख** का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर अपनी ब्रेड को '100% होल व्हीट' बताने के लिए गलत विज्ञापन करने का आरोप है, जबकि इसमें केवल **62%** ही गेहूं था।
विज्ञापन की पोल कैसे खुली?
CCPA की चीफ कमिश्नर निधि खरे के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि ब्रांड ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर जो दावे किए थे, वे भ्रामक थे। जांच में यह सामने आया कि ब्रेड में सिर्फ 62% ही होल व्हीट आटा था, जबकि बाकी 38% में राइस ब्रान जैसे अन्य घटक शामिल थे। कंपनी ने सफाई में कहा कि '100% होल व्हीट' का मतलब उसकी समग्र गुणवत्ता (Wholesomeness) से था, लेकिन रेगुलेटर ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया।
क्या है रेगुलेटर का सख्त रुख?
CCPA ने साफ कर दिया है कि Consumer Protection Act, 2019 के तहत किसी भी ब्रांड को विज्ञापन में सटीक आंकड़े देने होंगे। हालांकि ₹1 लाख का जुर्माना कंपनी के लिए छोटा हो सकता है, लेकिन यह FMCG सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अब कंपनियों को अपने इंग्रीडिएंट्स और मार्केटिंग दावों के बीच का गैप कम करना होगा, वरना उनकी ब्रांड वैल्यू पर सीधा असर पड़ सकता है।
अब आगे क्या?
ऑर्डर के अनुसार, Britannia को अब ये विज्ञापन तुरंत रोकने होंगे और 15 दिनों के भीतर कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। निवेशकों के लिए यह घटना रेगुलेटरी जोखिम को समझने का एक बड़ा सबक है, क्योंकि आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधी दावों (Health Claims) पर सरकारी नजर और पैनी रहने वाली है।
