क्विक कॉमर्स पर बढ़ा ब्रांड्स का विज्ञापन खर्च, सेल्स में तेज़ी की उम्मीद

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
क्विक कॉमर्स पर बढ़ा ब्रांड्स का विज्ञापन खर्च, सेल्स में तेज़ी की उम्मीद
Overview

कंज्यूमर ब्रांड्स अब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन पर ज़्यादा खर्च कर रहे हैं ताकि उन्हें बेहतर विजिबिलिटी और तेज़ी से सेल्स ग्रोथ मिल सके। वे डायरेक्ट रिटर्न ऑन एड स्पेंड (ROAS) देख रहे हैं, जो ट्रेडिशनल रिटेल से अलग है। Dabur और Nestle जैसी कंपनियां सेल्स बढ़ाने और सर्च रैंकिंग सुधारने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर अपना निवेश बढ़ा रही हैं।

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ई-कॉमर्स की जंग तेज़

बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तुरंत मार्केट इंपैक्ट की चाहत के बीच कंज्यूमर ब्रांड्स क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपने खर्च में ज़बरदस्त बढ़ोतरी कर रहे हैं। डिजिटल शेल्फ स्पेस एक जंग का मैदान बनता जा रहा है, जहाँ कंपनियां डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (DTC) प्रतिद्वंद्वियों और क्षेत्रीय खिलाड़ियों को पछाड़ने के लिए विजिबिलिटी और प्रमोशन एक्टिविटीज़ बढ़ा रही हैं।

यह बढ़ा हुआ खर्च इस बात को दर्शाता है कि प्लेटफॉर्म इन्वेस्टमेंट और तेज़ी से सेल्स बढ़ाने के बीच सीधा संबंध है। यह पारंपरिक जनरल ट्रेड में लगने वाले लंबे समय से बिलकुल अलग है। 'स्क्रीन प्रेजेंस' के लिए जगह बनाने की मजबूरी ब्रांड्स को अपने मार्केटिंग बजट का बड़ा हिस्सा इन तेज़-रफ्तार ई-कॉमर्स चैनलों पर प्रीमियम लिस्टिंग हासिल करने और सर्च इंजन विजिबिलिटी को ऑप्टिमाइज़ करने में लगाने पर मजबूर कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि चैनल पर ज़्यादा खर्च करने से सीधे तौर पर ग्रोथ बढ़ती है, जो ब्रांड-प्लेटफॉर्म संबंधों को नया आकार दे रहा है। उदाहरण के लिए, प्लेटफॉर्म पर खर्च 20% बढ़ाने से सेल्स में 40% की ग्रोथ मिल सकती है, जो इस डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच की एफिशिएंसी को दिखाता है।

ऑर्गेनिक रीच से आगे: स्ट्रैटेजिक प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन

ब्रांड्स सिर्फ ऑर्गेनिक रीच पर निर्भर नहीं हैं; वे क्विक कॉमर्स इन्वेस्टमेंट को अपने व्यापक मार्केटिंग इकोसिस्टम में इंटीग्रेट कर रहे हैं। इस दोहरे अप्रोच में टॉप प्लेसमेंट हासिल करने के लिए प्लेटफॉर्म्स पर सीधा पैसा लगाना और मास मीडिया कैंपेन व अपने सोशल मीडिया चैनलों के साथ मिलकर काम करना शामिल है।

Amul की स्ट्रैटेजी इसका एक उदाहरण है, जहाँ ट्रेडिशनल एडवरटाइजिंग और सोशल मीडिया एंगेजमेंट के ज़रिए ऑनलाइन चैनलों पर ट्रैफिक लाया जाता है, जो सीज़नल एक्टिवेशन्स को सपोर्ट करता है। कंपनियां प्लेटफॉर्म-एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट लॉन्च और ऑनलाइन खरीदारों का ध्यान खींचने के लिए तैयार किए गए कस्टमाइज्ड पैकेजिंग के साथ भी प्रयोग कर रही हैं।

Nestlé ने, उदाहरण के लिए, अपने कॉफी, चॉकलेट और नूडल प्रोडक्ट्स के लिए विशेष पैकेजिंग का उपयोग करके क्विक कॉमर्स ग्रोथ से अपनी ई-कॉमर्स मोमेंटम को बढ़ावा दिया। इसी तरह, Hindustan Unilever ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में अपनी क्विक कॉमर्स सेल्स को दोगुना कर दिया, जिसे डिजिटल-फर्स्ट प्रोडक्ट्स और डेटा-आधारित डिमांड जनरेशन स्ट्रैटेजीज़ से चलने वाली ओवरऑल ई-कॉमर्स सेल्स में 25% की बढ़ोतरी का समर्थन मिला।

कॉम्पिटिटर वॉच: रीजनल प्लेयर्स की पकड़ मज़बूत

जबकि बड़ी FMCG कंपनियां खर्च बढ़ा रही हैं, क्विक कॉमर्स स्पेस में भीड़ बढ़ती जा रही है। रीजनल प्लेयर्स और स्पेशलाइज्ड DTC ब्रांड्स खास प्रोडक्ट्स और हाइपर-लोकल डिलीवरी सर्विसेज़ देकर एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं, जिससे स्थापित ब्रांड्स को सिर्फ ब्रांड पहचान से ज़्यादा पर कंपीट करना पड़ रहा है।

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की तेज़ ग्रोथ पारंपरिक डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल्स के लिए भी एक चुनौती पेश करती है, क्योंकि कंज्यूमर्स रोज़मर्रा की चीज़ों की लगभग तुरंत डिलीवरी की उम्मीद करते हैं। इस बदलाव के लिए ब्रांड्स को इन फुर्तीले प्लेटफॉर्म्स की मांगों को पूरा करने के लिए अपनी सप्लाई चेन और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को अडैप्ट करने की ज़रूरत है।

Mother Dairy जैसी कंपनियों द्वारा देखी गई तेज़ ग्रोथ, जिन्होंने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर 40% ईयर-ऑन-ईयर बढ़ोतरी दर्ज की, सुविधा और गति के लिए विकसित हो रही कंज्यूमर प्रेफरेंस को रेखांकित करती है। इसके लिए प्रोडक्ट ऑफर्स और डिजिटल एंगेजमेंट स्ट्रैटेजीज़ में लगातार इनोवेशन की ज़रूरत है।

इन प्लेटफॉर्म्स की ओर रिसोर्सेज का स्ट्रैटेजिक आवंटन अब एक विकल्प नहीं, बल्कि इस डायनामिक रिटेल माहौल में प्रासंगिक बने रहने और मार्केट शेयर बनाए रखने का लक्ष्य रखने वाले ब्रांड्स के लिए एक ज़रूरी कदम बन गया है।

आगे का रास्ता: डेटा-ड्रिवेन एक्सपेंशन

क्विक कॉमर्स पर ब्रांड खर्च की भविष्य की दिशा का डेटा एनालिटिक्स और परफॉर्मेंस मेट्रिक्स पर बहुत ज़्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। ब्रांड्स संभवतः उन प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता देना जारी रखेंगे जो निवेश पर रिटर्न (ROI) का प्रदर्शन करते हैं, और मैक्सिमम विजिबिलिटी और कनवर्ज़न के लिए कैंपेन को ऑप्टिमाइज़ करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

डिमांड फोरकास्टिंग और पर्सनलाइज़्ड मार्केटिंग के लिए AI-पावर्ड टूल्स का इंटीग्रेशन और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। जैसे-जैसे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, इनोवेटिव कोलैबोरेशन, एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट लॉन्च और टेलर्ड प्रमोशनल स्ट्रैटेजीज़ मुख्य अंतर पैदा करेंगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.