Borosil Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के पहले नौ महीनों (9MFY26) में मिश्रित वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू साल-दर-साल करीब 9% बढ़कर ₹912 करोड़ हो गया।
हालांकि, इस वृद्धि के साथ परिचालन EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) में धीमी 3.4% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹145 करोड़ रहा। इसके चलते ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन पिछले साल के 17% से घटकर 16.2% रह गया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में मामूली 1.6% की बढ़ोतरी के साथ ₹64.1 करोड़ दर्ज किया गया।
सेगमेंट-वार परफॉरमेंस
कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ में Borosil Glassware सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा, जो 21% बढ़कर ₹231 करोड़ पर पहुँच गया। Larah Opalware सेगमेंट ने भी 7% की बढ़ोतरी के साथ ₹314 करोड़ का योगदान दिया।
लेकिन, नॉन-ग्लासवेयर सेगमेंट, जिसमें स्मॉल अप्लायंसेज, बोतलें, फ्लास्क और कुकवेयर शामिल हैं, का रेवेन्यू केवल 2% बढ़कर ₹349 करोड़ रहा। इस सेगमेंट को हाइड्रा बोतल बिज़नेस में 30% की भारी गिरावट से सबसे ज़्यादा झटका लगा। इसका मुख्य कारण भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नए कंप्लायंस नियम थे। कंपनी मैनेजमेंट ने इसे 'अनफॉर्चुनेट मिस' (unfortunate miss) बताया है, जिसमें चैनल की अनुपलब्धता और कॉम्पिटीटर्स को शेल्फ स्पेस खोना शामिल है।
वित्तीय स्थिति और विस्तार योजनाएं
मार्जिन पर दबाव के बावजूद, Borosil की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है। कंपनी के पास लगभग ₹13 करोड़ की नेट कैश पोजीशन है और 9MFY26 में ₹130 करोड़ का मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो जेनरेट किया।
भविष्य की ग्रोथ और सस्टेनेबिलिटी के लिए, कंपनी राजस्थान में बोतलों के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (CAPEX ~ ₹65 करोड़) स्थापित कर रही है। इसके अलावा, 20 MWp का सोलर प्लांट और बैटरी स्टोरेज (CAPEX ~ ₹75 करोड़) भी लगाया जा रहा है। इन दोनों परियोजनाओं के Q4 FY26 या शुरुआती Q1 FY27 तक चालू होने की उम्मीद है।
मुख्य चुनौतियां और भविष्य का आउटलुक
सबसे बड़ी चिंता हाइड्रा बोतल बिज़नेस पर BIS कंप्लायंस का असर है। IS 17803:2022 के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेशन की ज़रूरतें, जो 2024 के मध्य से प्रभावी हैं, ने पोर्टेबल वॉटर बॉटल बनाने वाले और आयात करने वाले निर्माताओं के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा की हैं। इससे नॉन-कंप्लायंट या देरी से एडॉप्ट करने वाले प्लेयर्स के मार्केट शेयर का नुकसान हुआ है। नॉन-ग्लासवेयर सेगमेंट की धीमी वृद्धि और ओपलवेयर सेगमेंट के 'अच्छे नहीं' रहे विकास को देखते हुए, कंपनी को अपने प्रोडक्ट लाइन्स में रणनीतिक रीकैलिब्रेशन की ज़रूरत है।
मैनेजमेंट लॉन्ग-टर्म प्रोस्पेक्ट्स को लेकर आशावादी है। वे स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल कारणों से प्लास्टिक से ग्लास की ओर बढ़ते उपभोक्ता रुझान का फायदा उठाने की उम्मीद कर रहे हैं, जो 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप है। उनका अनुमान है कि EBITDA मार्जिन भविष्य में 'low-20s' (20% के आसपास) तक पहुँच जाएगा। कंपनी अपनी ग्लासवेयर फैसिलिटी में 50% की ब्राउनफील्ड एक्सपेंशन की भी योजना बना रही है और अगले पांच सालों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के फायदे और सरकारी नीति समर्थन का लाभ उठाकर महत्वपूर्ण वृद्धि का लक्ष्य रख रही है।