बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में Old Monk रम के कुछ वेरिएंट्स पर लगी रोक को जारी रखा है। FSSAI ने लेबलिंग को भ्रामक बताया है, जिससे मैन्युफैक्चरर Mohan Rocky Springwater Breweries को हर दिन **₹1 करोड़** का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विवाद की जड़ क्या है?
कोर्ट का यह फैसला FSSAI की उस शिकायत के बाद आया है, जिसमें कंपनी के मार्केटिंग तरीकों पर सवाल उठाए गए थे। असल में, विवाद रम की बोतलों पर लिखे उन दावों को लेकर है जिनमें “7 years old blended” और “very old vatted” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। रेगुलेटर का तर्क है कि यह ग्राहकों को गुमराह करने जैसा है, क्योंकि यह असल में पुरानी रम नहीं बल्कि न्यूट्रल स्पिरिट से बनी है। FSSAI चाहती है कि इसे 'रम' के बजाय 'रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट' के रूप में बेचा जाए।
साथ ही, बोतल पर आर्टिफिशियल फ्लेवर्स से जुड़ी जरूरी वॉर्निंग के फॉन्ट साइज को बहुत छोटा रखा गया था, जो पब्लिक डिस्क्लोजर के नियमों का उल्लंघन है।
कंपनी पर भारी असर
Mohan Rocky Springwater Breweries ने कोर्ट को बताया कि इस पाबंदी के कारण कंपनी को हर दिन ₹1 करोड़ का रेवेन्यू लॉस हो रहा है। यह मामला फूड एंड बेवरेज सेक्टर में पारदर्शिता को लेकर बदलते कड़े नियमों का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
अब आगे क्या?
कंपनी ने अपनी पैकेजिंग में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें एज-रिलेटेड दावों को हटाना और डिस्क्लोजर को स्पष्ट करना शामिल है। अब स्टेट एक्साइज डिपार्टमेंट और FSSAI इन बदलावों की समीक्षा करेंगे। जब तक उन्हें रेगुलेटरी क्लीयरेंस नहीं मिल जाती, तब तक बिक्री पर रोक जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जिसमें पैकेजिंग सुधारों की समीक्षा की जाएगी।
