Bira 91 के संस्थापक Ankur Jain अपनी 17.8% हिस्सेदारी बेचने की तलाश में हैं। इस डील के लिए करीब ₹500 करोड़ की जरूरत होगी, जिससे कंपनी पर लदे कर्ज को चुकाया जा सके और कामकाज को फिर से शुरू किया जा सके।
Detailed Coverage
Bira 91 की पैरेंट कंपनी B9 Beverages ने अपने फाउंडर Ankur Jain की 17.8% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मौजूदा इन्वेस्टर Anicut Capital इस डील का नेतृत्व कर रहा है और कई प्राइवेट इक्विटी फर्मों, कॉर्पोरेट हाउसेस और फैमिली ऑफिस से संपर्क साधा है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब कंपनी एक साल से ज्यादा समय से ऑपरेशन्स में नहीं है और ब्रांड एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है।
कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए ₹500 करोड़ की दरकार
किसी भी नए निवेशक के लिए कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ सबसे अहम होगी। इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी पर चल रहे कर्ज, कर्मचारियों की सैलरी और रुके हुए ऑपरेशन्स को शुरू करने के लिए करीब ₹500 करोड़ की जरूरत बताई जा रही है। Bira 91 ब्रांड की मार्केट में पहचान तो है, लेकिन किसी भी खरीदार के लिए कंपनी को स्टेबल करने से पहले इन फाइनेंशियल देनदारियों को चुकाना जरूरी होगा।
कौन खरीद सकता है Bira 91?
बाजार में संभावित खरीदारों के तौर पर कंज्यूमर गुड्स और बेवरेज सेक्टर में अनुभव रखने वाले बड़े प्लेयर्स का नाम सामने आ रहा है। Varun Beverages, जो अपने बड़े बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए जानी जाती है, और Burman Family Office, जिसका फूड और बेवरेज इंडस्ट्री में अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है, को भी अप्रोच किया गया है। इसके अलावा, DS Group, जो अपने मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के लिए जाना जाता है, और Murugappa Group, जो टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी के लिए मशहूर है, के नाम भी इस हिस्सेदारी की खरीद से जुड़े हैं।
Bira 91 का सफर और मार्केट में पोजीशन
2015 में लॉन्च हुई Bira 91 ने भारतीय मार्केट में क्राफ्ट बीयर सेगमेंट को पेश करने में अहम भूमिका निभाई। खास ब्रांडिंग और युवा ग्राहकों पर फोकस करके कंपनी ने मजबूत पहचान बनाई, लेकिन बाद में वह फाइनेंशियल दबाव में आ गई। फाउंडर की हिस्सेदारी बेचने की वर्तमान कोशिश यह दिखाती है कि प्रीमियम बेवरेज ब्रांड को मार्केट में स्थापित करने में कितनी मुश्किलें आती हैं, खासकर तब जब मार्केट पर बड़े प्लेयर्स का कब्जा हो।
निवेशकों के लिए, यह स्थिति हाई-ग्रोथ स्टार्टअप्स में लिक्विडिटी और गवर्नेंस से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है। कंपनी की चल रही कानूनी लड़ाईयों को सुलझाने की क्षमता आने वाले महीनों में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होगी। चूंकि B9 Beverages एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए इसका सीधा असर स्टॉक मार्केट पर नहीं पड़ेगा, हालांकि इस हिस्सेदारी की बिक्री का नतीजा क्राफ्ट बेवरेज सेक्टर के प्राइवेट इक्विटी और स्ट्रेटेजिक निवेशकों के लिए आकर्षण को प्रभावित कर सकता है।
