Bikaji Foods ने वित्त वर्ष 2026-27 तक 15% का EBITDA मार्जिन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कच्चे माल और मार्केटिंग खर्चों में बढ़ोतरी के कारण कंपनी का मार्जिन पहली तिमाही (Q1 FY27) में घटकर **13.5%** रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में **14.8%** था। कंपनी का रेवेन्यू **12.5%** बढ़कर **₹7,343 मिलियन** हो गया है, लेकिन इनपुट कॉस्ट की अस्थिरता कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।
मार्जिन बढ़ाने की राह में क्या हैं बाधाएं?
Bikaji Foods International अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को स्थिर करने और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 तक 15% का EBITDA मार्जिन (ब्याज, टैक्स और डेप्रिसिएशन से पहले ऑपरेटिंग प्रॉफिट का एक अहम पैमाना) हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य हालिया वित्तीय दबावों के बीच तय किया गया है, जहां कंपनी ने Q1 FY27 में 13.5% मार्जिन दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 14.8% से कम है।
कंपनी का मैनेजमेंट हालिया मार्जिन में आई गिरावट के लिए कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और मार्केटिंग पर बढ़े हुए खर्च को मुख्य वजह बता रहा है। प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए कंपनी ने ब्रांड एंबेसडर अमिताभ बच्चन के साथ नए कैंपेन सहित विज्ञापनों पर खर्च बढ़ाया है। साथ ही, एडिबल ऑयल और पैकेजिंग जैसे जरूरी इनपुट की लागत में उतार-चढ़ाव ने प्रॉफिट लेवल बनाए रखने में मुश्किलें पैदा की हैं।
रेवेन्यू ग्रोथ स्थिर, विस्तार पर जोर
मार्जिन पर दबाव के बावजूद, रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। Bikaji ने पिछले क्वार्टर में 12.5% की साल-दर-साल रेवेन्यू बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹7,343 मिलियन तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी 7.7% बिक्री वॉल्यूम में वृद्धि से प्रेरित है। कंपनी अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार पर भारी जोर दे रही है, और इस साल 50,000 नए रिटेल आउटलेट जोड़ने की योजना है, जिससे उसका डायरेक्ट रीच 400,000 से अधिक हो जाएगा। ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी कंपनी की पहुंच बढ़ रही है, जो अब कुल बिजनेस का 4.3% योगदान करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और भविष्य की चुनौतियां
कंपनी घरेलू फोकस राज्यों में 25% से अधिक की ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखे हुए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस में मिले-जुले नतीजे दिख रहे हैं। Bikaji नए बाजारों में कदम रख रही है, जिसमें नेपाल में एक ज्वाइंट वेंचर और यूएई में एक नई सब्सिडियरी शामिल है। हालांकि, अमेरिका जैसे मौजूदा बाजारों में एक्सपोर्ट को वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़े उच्च माल ढुलाई लागतों के कारण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मैनेजमेंट इसे लंबी अवधि की मांग की समस्या के बजाय एक लॉजिस्टिकल चुनौती के रूप में देख रहा है।
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी बढ़ी हुई इनपुट लागतों को सफलतापूर्वक उपभोक्ताओं पर डाल पाएगी या प्रतिस्पर्धी दबाव इसकी प्राइसिंग पावर को सीमित करेगा। अन्य निगरानी योग्य बातों में नेपाल और यूएई में अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का सफल निष्पादन और संस्थापक के निधन के बाद नेतृत्व टीम द्वारा परिवर्तन का प्रबंधन कैसे किया जाता है, शामिल है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की लाभप्रदता के लिए कच्चे माल की अस्थिरता को प्रबंधित करने और आक्रामक विस्तार को फंड करने की क्षमता एक प्रमुख कारक होगी।
