Biggies Burger ने ₹100 करोड़ का रेवेन्यू पार कर लिया है और अब मार्च 2028 तक अपने बिजनेस को पांच गुना बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए टियर 2 और टियर 3 शहरों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।
Biggies Burger ने दर्ज किया ₹100 करोड़ का रेवेन्यू!
पूर्व आईटी प्रोफेशनल बिराजा राउत द्वारा शुरू किए गए फास्ट-फूड ब्रांड Biggies Burger ने ₹100 करोड़ के रेवेन्यू के माइलस्टोन को छू लिया है। फिलहाल, यह कंपनी भारत के 16 राज्यों में 150 से ज़्यादा आउटलेट्स का संचालन कर रही है।
फ्रेंचाइजी मॉडल से विस्तार की कहानी
बेंगलुरु में एक छोटे से कियोस्क के तौर पर शुरू हुई इस कंपनी ने शुरुआत में सिर्फ ₹20,000 के निवेश से अपनी यात्रा शुरू की थी। शुरुआती सफलता के बाद, Biggies Burger ने तेज़ी से विस्तार के लिए फ्रेंचाइजी-आधारित मॉडल अपनाया। इस तरीके से कंपनी देश भर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है, बिना हर आउटलेट का मालिकाना हक़ सीधे अपने पास रखे। कंपनी का दावा है कि शुरुआत से अब तक वह 50 लाख से ज़्यादा बर्गर बेच चुकी है।
भविष्य की ग्रोथ स्ट्रेटेजी
आगे की राह देखते हुए, कंपनी ने मार्च 2028 तक ₹500 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस ग्रोथ स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा टियर 2 और टियर 3 शहरों में पैठ बनाना है, जहां कंपनी को वेस्टर्न-स्टाइल फास्ट फूड के लिए बड़ा अनछुआ बाज़ार नज़र आता है। Biggies Burger ने लोकल स्वाद को मेन्यू में शामिल कर मेट्रो शहरों के बाहर भी ज़्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
भारतीय क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में मुकाबला कड़ा है, जहां कई बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अपनी हिस्सेदारी के लिए ज़ोर-आज़माइश कर रहे हैं। इस सेक्टर में कंपनियों को लगातार फूड इन्फ्लेशन, मार्जिन पर दबाव और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। निवेशक आमतौर पर ऐसे व्यवसायों में समान-स्टोर बिक्री ग्रोथ, नए स्टोर खोलने की गति और तेज़ी से विस्तार करते हुए मुनाफा बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखते हैं।
Biggies Burger का फ्रेंचाइजी मॉडल जहां विस्तार के लिए कम पूंजी की ज़रूरत बताता है, वहीं इसके अपने ऑपरेशनल जोखिम भी हैं। कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर फ्रेंचाइजी क्वालिटी कंट्रोल और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स को बनाए रखे ताकि ब्रांड की छवि खराब न हो। आने वाले सालों में, कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती इस आक्रामक विस्तार योजना को लागू करने के साथ-साथ अलग-अलग भारतीय बाज़ारों में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन नेटवर्क को कुशलतापूर्वक मैनेज करना होगी।
