BigBasket की पैरेंट कंपनी Innovative Retail Concepts ने FY26 के लिए 66% का बड़ा घाटा दर्ज किया है, जो ₹3,073 करोड़ रहा। वहीं, कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ में भी सिर्फ 7.7% की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, BigBasket अपनी ऑपरेशनल एक्टिविटीज़ को लगभग आधा करने जा रही है, ताकि सिर्फ मुनाफे वाले शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
BigBasket के लिए खराब रहा फाइनेंशियल ईयर
BigBasket का संचालन करने वाली कंपनी Innovative Retail Concepts के लिए पिछला फाइनेंशियल ईयर (March 2026 को समाप्त) काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कंपनी का घाटा बढ़कर 66% हो गया और यह ₹3,073 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल के ₹1,850 करोड़ के घाटे से काफी ज्यादा है। इसी दौरान, कंपनी का रेवेन्यू भी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा और इसमें केवल 7.7% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹8,223 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹7,634 करोड़ था।
नए CEO के नेतृत्व में बड़ा बदलाव
कंपनी अब अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को सुधारने के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक कदम उठा रही है। BigBasket अपने ऑपरेशनल एरिया को कम कर रही है। पहले 76 शहरों में काम करने वाली यह कंपनी अब सिर्फ लगभग 40 ऐसे शहरों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां वह मुनाफे में काम कर सकती है। यह फैसला आक्रामक विस्तार की रणनीति से अलग हटकर है और इसका मकसद उन सेक्टर्स में मार्जिन बचाना है जहां कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (Customer Acquisition Cost) बहुत ज्यादा है और डार्क स्टोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च आता है।
इस बदलाव का नेतृत्व नए चीफ एग्जीक्यूटिव अमित नंदा कर रहे हैं, जो पहले Amazon में काम कर चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कंपनी के फाउंडर हरि मेनन से यह पद संभाला है। मैनेजमेंट में यह बदलाव तेजी से बढ़ते ऑनलाइन ग्रॉसरी स्पेस में मुनाफे को प्राथमिकता देने की ओर इशारा करता है।
क्विक कॉमर्स में कड़ी प्रतिस्पर्धा
Tata Digital का हिस्सा BigBasket को Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। ये कंपनियां छोटे वेयरहाउस (डार्क स्टोर्स) का बड़ा नेटवर्क बना रही हैं ताकि ग्राहकों तक तेजी से डिलीवरी की जा सके। आंकड़ों के अनुसार, BigBasket के 700 से ज्यादा डार्क स्टोर्स हैं, वहीं Blinkit और Zepto के क्रमशः 2,400 और 1,100 से ज्यादा लोकेशन हैं। इस अंतर के कारण BigBasket के लिए डिलीवरी स्पीड और ग्राहक पहुंच के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों का मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।
दूसरी ओर, कंपनी का B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) आर्म, Supermarket Grocery Supplies, थोड़ा स्थिर प्रदर्शन कर रहा है। इसका रेवेन्यू 3.2% बढ़कर ₹2,298 करोड़ रहा और घाटा ₹102 करोड़ पर स्थिर रहा। अब देखना यह है कि क्या ऑपरेशन्स को कम करके कंपनी अपने खर्चे (Burn Rate) को कम कर पाती है और अगले कुछ क्वार्टर्स में अपने मार्जिन को स्थिर कर पाती है या नहीं। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि यह रीस्ट्रक्चरिंग कंपनी के बॉटम लाइन पर क्या असर डालती है।
