फेस्टिव सीजन में ब्यूटी सैलून के रेट्स में भारी उछाल आया है। रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतों और इनपुट टैक्स क्रेडिट हटने के कारण पैकेज के दाम दोगुने हो गए हैं। प्रीमियम सर्विसेज के लिए अब ग्राहकों को **₹5,000** से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं, फिर भी मांग में कोई कमी नहीं है।
लागत का दबाव और सप्लाई चेन का असर
सैलून चलाने की लागत में पिछले एक साल में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाले पाम ऑयल और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे रॉ मटेरियल 25% से 30% तक महंगे हो गए हैं। वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए जरूरी कच्चे माल का आयात महंगा हो गया है। इन बढ़ते खर्चों की भरपाई करने के लिए ही ऑपरेटरों ने सर्विस फीस में बढ़ोतरी का फैसला लिया है।
टैक्स पॉलिसी में बदलाव का झटका
वित्तीय दबाव की एक बड़ी वजह टैक्स नियमों में बदलाव है। हालांकि ब्यूटी सर्विसेज पर GST स्लैब को घटाकर 5% कर दिया गया था, लेकिन 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) की सुविधा हटा दी गई। अब कंपनियां उपकरण और रॉ मटेरियल पर चुकाए गए टैक्स का रिफंड क्लेम नहीं कर पा रही हैं। मार्जिन बचाने के लिए कंपनियां अब इस अतिरिक्त बोझ को सीधे ग्राहकों पर डाल रही हैं।
मांग पर क्यों नहीं पड़ा असर?
कीमतें ₹5,000 के पार जाने के बावजूद ग्राहक पीछे नहीं हट रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रीमियम ग्रूमिंग पैकेज की जबरदस्त मांग बनी हुई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि लग्जरी एक्सपीरियंस के प्रति ग्राहकों की दीवानगी फिलहाल महंगाई पर भारी पड़ रही है। हालांकि, निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या त्योहारी सीजन के बाद भी यह मांग इसी तरह बरकरार रह पाएगी या नहीं।
