Bata India अपने 'Zero Base Merchandising' (ZBM) मॉडल को 2026 तक 900 स्टोर्स तक बढ़ाने की तैयारी में है, ताकि इन्वेंटरी को बेहतर बनाया जा सके। इस कदम से कंपनी देश भर में 3,000 स्टोर्स का लक्ष्य पूरा करेगी, खासकर छोटे शहरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए। हालांकि, कंपनी ने Q1 FY27 में 23% मुनाफा बढ़ाया है, लेकिन निवेशकों की नजर फ्रैंचाइजी-आधारित बिजनेस मॉडल और कच्चे माल की लागत से जुड़े मार्जिन जोखिमों पर बनी हुई है।
Bata India का बड़ा रिटेल प्लान
Bata India अपनी रिटेल रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी की योजना है कि 2026 के अंत तक 900 स्टोर्स में 'Zero Base Merchandising' (ZBM) स्ट्रेटेजी लागू कर दी जाए। इसका मकसद 'एक जैसा स्टॉक' रखने के पुराने तरीके को बदलना है। कंपनी स्थानीय मांग के हिसाब से डेटा का इस्तेमाल करके स्टोर्स में वही प्रोडक्ट्स रखेगी जो वहां के कस्टमर्स की पसंद हैं। इससे फालतू इन्वेंटरी कम होगी, पॉपुलर साइज और स्टाइल हमेशा उपलब्ध रहेंगे और स्टोर की ओवरऑल परफॉरमेंस सुधरेगी।
3,000 स्टोर्स का लक्ष्य और छोटे शहरों पर फोकस
यह रिटेल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी की बड़ी एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। Bata India का लक्ष्य पूरे देश में 3,000 स्टोर्स तक पहुंचना है। इस ग्रोथ का एक अहम हिस्सा छोटे शहरों (Tier III और Tier IV) में तेजी से विस्तार करना है। इसके लिए कंपनी ज्यादातर फ्रैंचाइजी-आधारित बिजनेस मॉडल अपना रही है। इससे कंपनी कम पैसों में छोटे शहरों तक पहुंच पाएगी, बजाय इसके कि सिर्फ कंपनी के अपने बड़े शोरूम खोले जाएं।
Q1 FY27 में दमदार नतीजे
यह स्ट्रेटेजिक कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी फाइनेंशियल रिकवरी के संकेत दे रही है। 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (30 जून 2026 को समाप्त) में Bata India ने ₹637 मिलियन का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 23% ज्यादा है। वहीं, रेवेन्यू में भी लगभग 4% की ग्रोथ देखी गई और यह ₹9,789 मिलियन रहा। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर से अलग है, जब लागत बढ़ने और कुछ खास खर्चों के कारण टर्नओवर लगभग स्थिर था। कंपनी ने अगस्त 2026 में शेयरधारकों को ₹25 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी दिया है।
मार्जिन और लागत का गणित
इन सुधारों के बावजूद, कंपनी के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां हैं। जैसे-जैसे Bata फ्रैंचाइजी पार्टनर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपना नेटवर्क बढ़ा रही है, उसके रेवेन्यू चैनल का मिक्स बदल रहा है। इस बदलाव से कभी-कभी मार्जिन पर असर पड़ सकता है, क्योंकि फ्रैंचाइजी सेल्स की कॉस्टिंग, कंपनी के अपने रिटेल ऑपरेशन से अलग होती है। कंपनी को इस ग्रोथ को अपने प्रॉफिट मार्जिन के साथ सावधानी से बैलेंस करना होगा।
रॉ मैटेरियल की महंगाई और कॉम्पिटिशन
इसके अलावा, फुटवियर इंडस्ट्री कच्चे माल की महंगाई के प्रति काफी संवेदनशील है। तेल की कीमतों और सिंथेटिक मैटेरियल्स से जुड़ी बढ़ती लागतें कंपनी के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई हैं। बड़े ग्लोबल फुटवियर ब्रांड्स और चुस्त डोमेस्टिक प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, Bata के लिए अपनी मार्केट शेयर बनाए रखना और लागतों को मैनेज करना महत्वपूर्ण होगा। उसकी रिटेल स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके नए प्रोडक्ट डिजाइन और स्टोर फॉर्मेट स्थानीय मांग को बिक्री में कितनी अच्छी तरह बदल पाते हैं।
निवेशकों की नजर
आगे चलकर, निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी कितनी तेजी से नए स्टोर्स खोल पाती है और क्या इन्वेंटरी मैनेजमेंट में सुधार से लगातार मार्जिन बढ़ पाता है। आने वाली तिमाहियों में मैनेजमेंट की सप्लाई चेन की दबावों को संभालने और प्रतिस्पर्धी माहौल में कंज्यूमर की मांग बनाए रखने की क्षमता प्रमुख फोकस एरिया रहेगी।
