क्यों ज़रूरी है यह 'टर्नाअराउंड' प्लान?
Bata India के CEO Panos Mytaros ने कंपनी को उबारने के लिए एक बड़ा 5 साल का ग्रोथ प्लान पेश किया है। यह प्लान इसलिए भी ज़रूरी हो गया है क्योंकि कंपनी का शेयर अपने 52-week हाई ₹1,300 से लगभग 50% गिरकर ₹641.50 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह भारी गिरावट बाज़ार की धीमी ग्रोथ और ज़बरदस्त कॉम्पिटिशन का नतीजा है। Mytaros ने भारत को एक 'सोता हुआ विशालकाय' (sleeping giant) बताया है जिसे जगाने की ज़रूरत है। सबसे बड़ी चुनौती ब्रांड और उसके प्रोडक्ट्स को आज के भारतीय खरीदारों के लिए आकर्षक बनाना है, जिसे उन्होंने एक बड़ा 'जॉब टू बी डन' (job to be done) बताया है।
युवा खरीदारों को टारगेट करेगी नई रणनीति, कॉम्पिटिटर्स से कड़ी टक्कर
इस नई रणनीति का मुख्य ज़ोर Bata के प्रोडक्ट्स को रिफ्रेश करने पर है, खासकर स्नीकर्स (sneakers) पर, ताकि युवा ग्राहकों को लुभाया जा सके। Mytaros का इरादा पारंपरिक जूतों को स्नीकर्स के बड़े कलेक्शन से अलग करना है, जो Gen Z और युवा Millennials को टारगेट करेगा। यह उस बाज़ार में बेहद ज़रूरी है जहाँ Nike और Adidas जैसे ग्लोबल ब्रांड्स, साथ ही Metro Brands (P/E 61.81), Campus Activewear (P/E 48.59), और Relaxo Footwears (P/E 41.40) जैसी मज़बूत भारतीय कंपनियाँ मौजूद हैं। Skechers (P/E 14.41) भी एक बड़ा कॉम्पिटिटर है। फुर्तीले डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स भी अपनी पैठ बना रहे हैं। कॉम्पिटिटर्सgetKey partnerships हासिल कर रहे हैं, जैसे Metro Brands का Foot Locker के साथ भारत में स्टोर चलाने का एग्रीमेंट। भारतीय फुटवियर मार्केट के 2032 तक USD 12.58 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो सालाना 3.23% की दर से बढ़ेगा, लेकिन Bata को अपना हिस्सा पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
वित्तीय दबाव और मार्केट वैल्यूएशन
Bata India वित्तीय दबावों का सामना कर रही है। कंपनी का ट्रेलिंग P/E रेश्यो लगभग 43.88 है, और मार्केट कैप ₹7,806.4 करोड़ के आसपास है। यह वैल्यूएशन Nike (P/E 30.71) और Adidas (P/E 18.07) जैसे ग्लोबल प्लेयर्स की तुलना में काफी ज़्यादा है, और यहाँ तक कि Metro Brands (P/E 61.81) जैसे डोमेस्टिक कॉम्पिटिटर्स से भी ज़्यादा है। Bata India का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.90 है और इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो 2.41 है, जो बताता है कि इसे अपने कर्ज़ को मैनेज करने के लिए मज़बूत अर्निंग ग्रोथ की ज़रूरत है। स्टॉक के 52-week परफॉरमेंस में -39.89% की गिरावट देखी गई है, जो निवेशकों की चिंताओं को दर्शाती है। भले ही डोमेस्टिक प्रोडक्शन ग्लोबल सप्लाई चेन की लागत में बढ़ोतरी से कुछ हद तक बचाता है, लेकिन Bata की वित्तीय सेहत और बाज़ार की पोजीशन की समीक्षा हो रही है। कंपनी का P/E 43.3 और मार्केट कैप ₹8,320 करोड़ इसकी बुक वैल्यू ₹119 और ROE 15.6% के मुकाबले एक ऊँचे वैल्यूएशन का संकेत देते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में Bata India का P/E 70.95 भी दिखाया गया है, जो गणना की विभिन्न विधियों के कारण हो सकता है, लेकिन दोनों ही एक बड़े मार्केट मल्टीपल की ओर इशारा करते हैं।
भारत में डील करते हुए एक्सपोर्ट्स और ग्लोबल प्लान्स
Bata भारत से अगले 5 सालों में एक्सपोर्ट्स (exports) को काफी बढ़ाने की योजना बना रही है, और अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल ग्लोबल सप्लाई के लिए करेगी। डोमेस्टिक ग्रोथ और इंटरनेशनल एक्सपेंशन पर यह फोकस भारत में इसके ऑपरेशंस के महत्व को रेखांकित करता है। CEO Mytaros के Ecco में पिछले अनुभव वैश्विक बाज़ारों के लिए मददगार हो सकते हैं, लेकिन सबसे ज़रूरी काम है भारत में, जो कंपनी का सबसे बड़ा मार्केट है, इस गिरावट को रोकना। कंपनी का शेयर 52-week के लो ₹605 को भी छू चुका है, जो इस नई रणनीति से पहले के मुश्किल दौर को दर्शाता है।