ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर बिक रहीं जहरीली क्रीम, ई-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ रहा कानूनी संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर बिक रहीं जहरीली क्रीम, ई-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ रहा कानूनी संकट

दुनिया भर की बड़ी ई-कॉमर्स साइट्स पर मरकरी (पारा) युक्त खतरनाक स्किन-लाइटनिंग क्रीम की बिक्री जारी है। इस मामले ने कंपनियों के सामने रेगुलेटरी और कानूनी जोखिम पैदा कर दिया है, क्योंकि थर्ड-पार्टी सेलर्स पर लगाम लगाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

ग्लोबल ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर मरकरी (पारा) की जहरीली मात्रा वाली स्किन-लाइटनिंग क्रीम का मिलना जारी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सख्त सुरक्षा दिशा-निर्देशों के बावजूद, Amazon, Temu और TikTok Shop जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अभी भी ऐसे उत्पाद बिक रहे हैं जो कानूनी मानकों का उल्लंघन करते हैं।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए अनुपालन (Compliance) की चुनौती

निवेशकों के नजरिए से, यह मुद्दा ई-कॉमर्स दिग्गजों के लिए एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क है। हालांकि कंपनियों की खतरनाक सामान बेचने के खिलाफ नीतियां हैं, लेकिन लाखों थर्ड-पार्टी सेलर्स के कारण इन्हें लागू करना मुश्किल हो जाता है। सेलर्स अक्सर प्रोडक्ट का नाम बदलकर या पैकेजिंग में हेरफेर करके ऑटोमेटेड डिटेक्शन सिस्टम को चकमा दे देते हैं।

यह स्थिति एक बड़ी कानूनी देनदारी (Legal Liability) बन चुकी है। पहले भी Walmart जैसे बड़े रिटेलर्स को ऐसे मामलों में कानूनी निपटान करना पड़ा है। हाल ही में अगस्त 2026 में, 'Mercury Policy Project' ने Poshmark Inc. पर मुकदमा दायर किया है, जिसमें सुरक्षा चेतावनी न देने का आरोप लगाया गया है। जैसे-जैसे रेगुलेटर्स ऑनलाइन सुरक्षा पर सख्त हो रहे हैं, इन प्लेटफॉर्म्स को कंप्लायंस और लीगल डिफेंस पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ेगा।

हेल्थ और रेगुलेटरी कॉन्टेक्स्ट

मरकरी एक जहरीला पदार्थ है जो किडनी डैमेज और न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बन सकता है। 2013 के 'मिनामाता कन्वेंशन' (Minamata Convention) के तहत देशों ने मरकरी वाले उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया है। अमेरिका जैसे देशों में कॉस्मेटिक्स में मरकरी की सीमा 1 पार्ट पर मिलियन (ppm) तय है, जबकि जांच में कुछ क्रीम्स में यह मात्रा 30,000 ppm से भी ज्यादा पाई गई है।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

रेगुलेटरी बॉडीज अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को उनके डिजिटल स्टोरफ्रंट पर बिकने वाले सामान के लिए सीधे जिम्मेदार मान रही हैं। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या कंपनियां नए और सख्त सेलर-वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल अपना रही हैं या AI-आधारित कंप्लायंस टूल्स में निवेश कर रही हैं। भविष्य में सख्त कानूनों के कारण कंपनियों के बिजनेस मॉडल में बदलाव आ सकता है, जिससे हर प्रोडक्ट की सुरक्षा जांच की लागत बढ़ सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.