Banas Dairy ने गुजरात में अपनी फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग क्षमता को बढ़ाकर **5 टन प्रति घंटा** कर दिया है। **₹51.65 करोड़** के इस विस्तार से Amul ब्रांड की सप्लाई चेन और मजबूत होगी, साथ ही स्थानीय किसानों के साथ सीधे जुड़ाव से कच्चे माल की लागत पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।
क्षमता में बड़ा विस्तार
बनास डेयरी (Banas Dairy), जो Amul का एक प्रमुख हिस्सा है, अब गुजरात के देवदर तालुका के सनादर स्थित अपनी यूनिट को अपग्रेड कर रही है। पहले यहां 2 टन प्रति घंटा की क्षमता थी, जिसे अब बढ़ाकर 5 टन प्रति घंटा कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन इस हफ्ते प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।
वर्टिकल इंटीग्रेशन की रणनीति
पैकेज्ड फूड सेक्टर में यह कदम एक बड़े बदलाव का संकेत है। कंपनी अब 'सीड टू शेल्फ' यानी बीज से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक की पूरी चेन को कंट्रोल कर रही है। इससे रॉ मटेरियल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सकेगा और क्वालिटी को बनाए रखना आसान होगा।
किसानों के लिए क्या है खास?
बनास डेयरी ने एक एडवांस प्रोक्योरमेंट सिस्टम बनाया है। कंपनी किसानों को सर्टिफाइड आलू के बीज उपलब्ध कराती है और सीजन की शुरुआत में ही दाम तय कर दिए जाते हैं। इससे किसानों को मार्केट में कीमतों के बड़े झटकों से सुरक्षा मिलती है। साथ ही, 10,000 टन की कोल्ड स्टोरेज सुविधा से फसल की बर्बादी भी रुकेगी।
FMCG सेक्टर पर असर
भले ही बनास डेयरी एक कोऑपरेटिव है, लेकिन इसका असर लिस्टेड कंपनियों पर भी पड़ेगा। फ्रोजन स्नैक्स सेगमेंट में ITC और Prataap Snacks जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ सकती है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की कैपेसिटी एडिशन से भारतीय मार्केट में फ्रोजन स्नैक्स की सप्लाई और प्राइसिंग में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि, मौसम की मार और सरकारी नीतियों में बदलाव इस बिजनेस मॉडल के लिए हमेशा रिस्क बने रहते हैं। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर होंगी कि नई क्षमता का उपयोग कंपनी कितनी कुशलता से करती है।
