Balrampur Chini Mills ने पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट **14.5%** घटकर **₹44.15 करोड़** रह गया है। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू **6%** से ज्यादा बढ़ा है। नतीजों के बाद शेयर बाजार में निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली और स्टॉक में करीब **6%** की गिरावट आई।
मार्जिन पर दबाव और बढ़ती लागत
Balrampur Chini Mills ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए। इस अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 14.5% गिरकर ₹44.15 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में इस गिरावट के साथ ही कंपनी के शेयर में भी लगभग 5.75% की कमी आई और यह ₹616.75 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 6.13% बढ़कर ₹1,636.79 करोड़ रहा, लेकिन बढ़ती लागतों ने बॉटम लाइन को प्रभावित किया।
EBITDA मार्जिन में गिरावट
कंपनी की परिचालन लाभप्रदता (Operational Profitability) भी प्रभावित हुई है। EBITDA मार्जिन घटकर 6.96% रह गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 8.70% था। कंपनी का कहना है कि गन्ने की बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट और इथेनॉल खरीद मूल्य को लेकर सरकारी नियमों के कारण मार्जिन पर दबाव है।
नए PLA प्रोजेक्ट का बोझ
Balrampur Chini का बड़ा निवेश और फोकस इस समय उसके नए पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) प्रोजेक्ट पर है, जो बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है और कंपनी की लाभप्रदता पर बोझ बन रहा है। पिछली तिमाही में, PLA सेगमेंट ने ₹17.44 करोड़ का रेवेन्यू तो जेनरेट किया, लेकिन ₹9.84 करोड़ का घाटा भी दर्ज किया। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने लगभग ₹3,080 करोड़ का बजट रखा है, और जून 2026 तक इसके लिए ₹1,086 करोड़ का लॉन्ग-टर्म कर्ज लिया जा चुका था।
बोर्ड में बदलाव
वित्तीय नतीजों के अलावा, कंपनी ने वर्तिका शुक्ला को अतिरिक्त, गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक (Additional, Non-Executive Independent Director) के तौर पर नियुक्त करने की घोषणा की है। उनका यह कार्यकाल पांच साल के लिए होगा और शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे चलकर निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने मौजूदा चीनी और इथेनॉल के कारोबार को नए PLA प्रोजेक्ट की भारी पूंजीगत जरूरतों के साथ कैसे संतुलित करती है। यह नया प्रोजेक्ट कब तक मुनाफे में आएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, सरकार की चीनी निर्यात और इथेनॉल मूल्य निर्धारण से जुड़ी नीतियां भी कंपनी की लाभप्रदता को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगी।
