नतीजों ने भरी उड़ान, मार्जिन ने तोड़े रिकॉर्ड
Bajaj Consumer Care ने 17 अप्रैल 2026 को जारी किए अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे, जिसने बाजार को हैरान कर दिया। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 30.4% बढ़कर ₹326.7 करोड़ हो गया। लेकिन असली जादू तो कंपनी की कमाई में दिखा। EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) मार्जिन पिछले साल के 12.7% से बढ़कर इस तिमाही में 23.4% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। EBITDA ₹76.5 करोड़ के पार चला गया, जो पिछले साल से दोगुने से भी ज्यादा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹63.6 करोड़ रहा। इसी शानदार परफॉरमेंस के दम पर शेयर की कीमत 14% से ज्यादा उछलकर ₹493.90 के 52-हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गई।
FMCG सेक्टर में अलग दम, कंपनी का बदला दांव
यह तेजी तब आई है जब भारत का FMCG सेक्टर मिला-जुला प्रदर्शन कर रहा है। Nifty FMCG इंडेक्स में हाल ही में 6% की गिरावट देखी गई थी, और ITC, Hindustan Unilever जैसे बड़े नामों के शेयर भी दबाव में थे। ऐसे में Bajaj Consumer Care का यह प्रदर्शन वाकई काबिले तारीफ है। पहले सिर्फ Bajaj Almond Drops हेयर ऑयल पर निर्भर रहने वाली इस कंपनी ने अब अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। नए मैनेजमेंट के तहत, कंपनी ने कोकोनट हेयर ऑयल और स्किन व हेयर केयर के नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जो अब कुल रेवेन्यू का करीब 25% हिस्सा बन चुके हैं। पिछले एक साल में कंपनी के शेयर ने 115.99% का शानदार रिटर्न दिया है, जो मार्केट से कहीं बेहतर है।
क्या मार्जिन की तेजी बनी रहेगी? दांव पर हैं कुछ खतरे
हालांकि, कई विश्लेषक (Analysts) अब इस सवाल पर मंथन कर रहे हैं कि क्या कंपनी अपने रिकॉर्ड 23.4% के EBITDA मार्जिन को बनाए रख पाएगी। यह ऐतिहासिक 14.1% के औसत से काफी ऊपर है। कंपनी कच्चे तेल से बनने वाले लाइट लिक्विड पैराफिन (LLP) पर निर्भर है, जिसकी वजह से ग्लोबल एनर्जी कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इसकी कमाई पर पड़ सकता है। भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) से रॉ मैटेरियल की लागत बढ़ सकती है और सप्लाई चेन (Supply Chain) बाधित हो सकती है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो EBITDA मार्जिन 1.5% से 2.5% तक गिर सकता है। इसके अलावा, Hindustan Unilever और Dabur जैसे बड़े FMCG प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती है। हाल ही में स्ट्रैटेजी और ऑडिट जैसे अहम विभागों से सीनियर मैनेजमेंट के इस्तीफे ने भी कुछ अस्थायी अनिश्चितता ला दी है।
विश्लेषकों की राय और भविष्य का रास्ता
विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ के प्राइस टारगेट मौजूदा बाजार भाव से कम हैं, जो कुछ विश्लेषकों के बीच मंदी (bearish sentiment) का संकेत देते हैं। हालांकि, कुल मिलाकर 'Buy' रेटिंग बनी हुई है और अगले 12 महीनों के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹362.99 या ₹450 तक का अनुमान है। कंपनी के 'Mojo Grade' को हाल ही में 'Strong Buy' में अपग्रेड किया गया है, जो संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का बढ़ता भरोसा दिखा रहा है। मैनेजमेंट का फोकस प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन, ब्रांड प्रमोशन और इंटरनेशनल एक्सपेंशन पर है, लेकिन इन रिकॉर्ड मार्जिन को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
