दिल्ली हाई कोर्ट ने लग्जरी ब्रांड Forest Essentials की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने Baby Forest पर ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाया था। कोर्ट ने साफ कहा है कि 'Forest' शब्द एक डिस्क्रिप्टिव टर्म है, जिससे Baby Forest अपना नाम बरकरार रख पाएगा।
लग्जरी आयुर्वेद ब्रांड Forest Essentials और उभरते हुए ब्रांड Baby Forest के बीच चल रहा कानूनी विवाद फरवरी 2026 में उस समय समाप्त हुआ, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने Forest Essentials की अपील को खारिज कर दिया। लग्जरी रिटेलर ने Baby Forest को उनके नाम में 'Forest' शब्द का उपयोग करने से रोकने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह शब्द वेलनेस इंडस्ट्री में सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाला एक डिस्क्रिप्टिव टर्म है, जिस पर कोई विशेष कंपनी अपना एकाधिकार नहीं जता सकती।
कंपनियों का वित्तीय पक्ष
The Estée Lauder Companies के सहयोग से चल रही Forest Essentials का नेटवर्क 150 से ज्यादा स्टोर्स का है और कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में लगभग ₹572 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया है। वहीं दूसरी ओर, गगन अग्रवाल द्वारा 2022 में स्थापित Baby Forest की रणनीति अलग रही है। कंपनी का फोकस डिजिटल विज्ञापनों के बजाय सीधे मेटरनिटी सेंटर्स और अस्पतालों से जुड़ने पर है। कंपनी का रेवेन्यू FY26 तक लगभग ₹26.61 करोड़ तक पहुंच गया है और यह प्रॉफिटेबल भी बनी हुई है।
बाजार का परिदृश्य
यह फैसला भारतीय कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रेडमार्क को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए, न कि केवल एक शब्द के आधार पर। फिलहाल भारत का बेबी केयर मार्केट $7.7 बिलियन का है, जिसके 2034 तक $11.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। कानूनी अनिश्चितता खत्म होने के बाद अब निवेशकों की नजर Baby Forest के बिजनेस मॉडल की स्केलेबिलिटी पर होगी कि कैसे यह दिग्गज खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाए रखता है।
