बेंगलुरु कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन (BAMUL) अपने लोकप्रिय ब्रांड Nandini के घी (Ghee) और मक्खन (Butter) की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कर रहा है। यह बदलाव 24 जुलाई 2026 से लागू होगा। घी की कीमतों में करीब **2%** की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि मक्खन की कीमतों में लगभग **8%** का इजाफा देखा गया है। डेयरी सेक्टर में दूध खरीद और प्रोसेसिंग की बढ़ती लागतों के कारण यह कदम उठाया गया है।
Detailed Coverage
Nandini Ghee और Butter की नई कीमतें
बेंगलुरु कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन (BAMUL) ने अपने Nandini ब्रांड के घी और बटर उत्पादों की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह नई मूल्य सूची शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। यूनियन द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रतिशत वृद्धि का विवरण नहीं दिया गया है, लेकिन बाजार के अनुमानों के अनुसार, घी की कीमतों में लगभग 2.14% और मक्खन उत्पादों में 8% की वृद्धि होने की उम्मीद है।
नई गाइडलाइन के तहत, एक लीटर Nandini घी की कीमत अब ₹715 होगी। वहीं, एक लीटर पीईटी जार और एक लीटर टिन की कीमत क्रमशः ₹735 और ₹750 कर दी गई है। थोक खरीदारों के लिए, 15 किलो घी टिन की कीमत ₹11,625 निर्धारित की गई है। मक्खन सेगमेंट में, 500 ग्राम नमकीन मक्खन (Salted Butter) पैक की अधिकतम खुदरा कीमत अब ₹310 होगी, और 500 ग्राम अनसाल्टेड (Unsalted) वैरिएंट ₹330 में मिलेगा। बटर ब्लिस्टर फैमिली पैक की कीमत भी ₹80 कर दी गई है।
डेयरी सेक्टर में लागत का दबाव
BAMUL द्वारा यह मूल्य संशोधन ऐसे समय में आया है जब पूरे भारत में डेयरी सहकारी समितियां परिचालन लागत में वृद्धि का सामना कर रही हैं। डेयरी व्यवसाय में, सहकारी समितियां आमतौर पर किसानों से दूध की खरीद लागत और प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्चों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए खुदरा कीमतों को समायोजित करती हैं। निवेशकों के लिए, इन इनपुट लागतों को उपभोक्ताओं पर डालने की क्षमता परिचालन मार्जिन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
डेयरी क्षेत्र का प्रदर्शन अक्सर कच्चे माल की कीमतों, विशेष रूप से कच्चे दूध की लागत के प्रति संवेदनशील होता है, जो मौसमी आपूर्ति और चारे की लागत के आधार पर घटता-बढ़ता रहता है। हालांकि BAMUL जैसी सहकारी यूनियनें लाभ को अधिकतम करने के बजाय सदस्य-किसानों को लाभ देने के मॉडल पर काम करती हैं, फिर भी उन्हें अपनी प्रोसेसिंग और वितरण लागतों को कवर करने के लिए वित्तीय स्थिरता बनाए रखनी होती है। इन मूल्य वृद्धि का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि Nandini उत्पादों की उपभोक्ता मांग स्थिर रहती है या ग्राहक कम लागत वाले निजी लेबल विकल्पों को चुनते हैं। निवेशक आमतौर पर मूल्य वृद्धि के साथ-साथ वॉल्यूम ग्रोथ पर भी नजर रखते हैं, क्योंकि ऊंची कीमतें कभी-कभी मांग में अस्थायी गिरावट या उपभोक्ता खरीदारी पैटर्न में छोटे पैक साइज की ओर बदलाव ला सकती हैं। यह देखने के लिए कि क्या ये मूल्य समायोजन हाल के परिचालन मार्जिन दबाव की भरपाई करने में सफल होते हैं, यूनियन के अगले वित्तीय अपडेट पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
