Avenue Supermarts, जो D-Mart चलाती है, ने बताया है कि अप्रैल-जून तिमाही में छोटे शहरों (non-metro) के स्टोर्स ने बड़े शहरों (metro) के पुराने स्टोर्स से बेहतर प्रदर्शन किया है। यह भारतीय ग्राहकों के बदलते रुझान को दर्शाता है, जहां छोटे शहर विकास को गति दे रहे हैं, वहीं बड़े शहरी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
मेट्रो स्टोर्स से आगे निकले छोटे शहरों के स्टोर्स
भारतीय रिटेल कंपनियां अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, क्योंकि शहरी बाजारों में ग्रोथ धीमी पड़ रही है। Avenue Supermarts, जो पॉपुलर D-Mart रिटेल चेन चलाती है, ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के अपने प्रदर्शन अपडेट में इस ट्रेंड को साफ दिखाया है। जहां मेट्रो शहरों में पुराने स्टोर्स की बिक्री में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, वहीं कंपनी के नए नॉन-मेट्रो आउटलेट्स ने कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।
छोटे शहरों की ग्रोथ ने शहरी सुस्ती को दी मात
निवेशकों के लिए यह बदलाव बहुत अहम है, क्योंकि इससे रिटेल दिग्गज कंपनियों के कैपिटल एलोकेशन (पूंजी आवंटन) की रणनीति बदल रही है। Avenue Supermarts ने तिमाही के लिए 15% का कुल रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया है, जिसमें छोटे शहरों के स्टोर्स की सफलता का बड़ा हाथ है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण बड़े शहरी केंद्र संतृप्त हो गए हैं। ऐसे में, कंपनियों को टियर-2 और टियर-3 शहरों में फिजिकल स्टोर विस्तार के लिए ज्यादा मौके मिल रहे हैं। इस रणनीति का मकसद इन अंदरूनी इलाकों के ग्राहकों की बढ़ती खर्च करने की क्षमता का फायदा उठाना है, जो ब्रांडेड और मॉडर्न रिटेल उत्पादों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
इंडस्ट्री-वाइड स्ट्रैटेजिक शिफ्ट
यह ट्रेंड सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। रिटेल के विभिन्न सेगमेंट के बड़े खिलाड़ी इस मांग को पूरा करने के लिए अपनी रणनीति बदल रहे हैं। Tata Group की रिटेल कंपनी Trent ने अपनी लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट में बताया है कि वह इन माइक्रो-मार्केट्स में ग्रोथ को प्राथमिकता दे रही है। इसी तरह, Reliance Retail और Titan जैसी रिटेल कंपनियां भी रीजनल हब में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं।
फूड एंड बेवरेज सेक्टर में Jubilant Foodworks और Devyani International जैसी चेन भी बड़े शहरों में घनी आबादी वाले स्टोर्स की अपनी पारंपरिक रणनीति से हटकर, छोटे शहरों में ज्यादा आउटलेट खोल रही हैं ताकि वे व्यापक ग्राहक आधार तक पहुंच सकें। FMCG दिग्गज Hindustan Unilever और Nestle India भी टेक्नोलॉजी और बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, जैसे AI-पावर्ड सप्लाई चेन, का उपयोग करके यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उनके उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों तक गहराई से पहुंचें।
ग्रामीण मांग को प्रभावित करने वाले कारक
इन इलाकों में विस्तार के पीछे कई आर्थिक कारक हैं। कृषि मजदूरी में बढ़ोतरी और लगातार मॉनसून से अच्छी फसल होने के कारण ग्रामीण इलाकों में डिस्पोजेबल इनकम बढ़ी है। हालांकि अल नीनो जैसे पर्यावरणीय कारक कृषि-आधारित आय के लिए जोखिम बने हुए हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में नॉन-फार्म इकोनॉमी का विस्तार खपत के लिए एक बफर का काम कर रहा है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए
छोटे बाजारों में विस्तार करते हुए इन कंपनियों की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता एक प्रमुख फैक्टर बनी हुई है। हालांकि ग्रामीण मांग फिलहाल मजबूत है, लेकिन इसमें अक्सर उच्च वितरण लागत और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां आती हैं। निवेशक यह देख सकते हैं कि ये कंपनियां नए स्टोर्स पर कैपिटल स्पेंडिंग को इन छोटे स्थानों में प्रति स्टोर वास्तविक रेवेन्यू से कैसे मैनेज करती हैं। स्टोर-लेवल प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन पर कच्चे माल की कीमतों के प्रभाव पर भविष्य के अपडेट इस ग्रामीण-केंद्रित रणनीति की दीर्घकालिक सफलता को समझने के लिए आवश्यक होंगे।
