Avenue Supermarts, जो DMart रिटेल चेन चलाती है, अब अपने ग्रोथ का फोकस छोटे शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर बढ़ा रही है। कंपनी के लिए यह बड़ा बदलाव इसलिए है क्योंकि जून तिमाही में उनके स्टोर सेल्स ग्रोथ में कमी आई है।
क्यों बदल रही है रणनीति?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून तिमाही में Avenue Supermarts की सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ घटकर 5.5% रह गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 7.1% थी। कंपनी का कहना है कि छोटे शहरों में उनके स्टोर्स अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि बड़े शहरों के पुराने और बड़े स्टोर्स में बिक्री स्थिर हो गई है।
क्लस्टर स्ट्रैटेजी और नए इलाके
DMart अपनी पुरानी 'क्लस्टर-बेस्ड' एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी पर ही कायम है। इसमें वे बड़े वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के आसपास स्टोर्स का नेटवर्क बनाते हैं ताकि खर्च कम रहे। कंपनी महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। साथ ही, ओडिशा, हरियाणा, उत्तराखंड और गोवा जैसे नए राज्यों में भी कदम रख रही है। असली चुनौती यह है कि इन नए इलाकों में भी 'हर दिन कम कीमत' (everyday low price) का अपना वादा निभाते हुए, बिना कर्ज बढ़ाए या सप्लाई चेन को और जटिल किए विस्तार किया जाए।
ऑनलाइन बिजनेस को समेटा
Avenue Supermarts ने अपने ऑनलाइन वेंचर, DMart Ready पर भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने के लिए इसे कई शहरों में बंद कर दिया है। पिछले साल जहां यह 24 शहरों में मौजूद था, वहीं अब घटकर सिर्फ 11 शहरों में रह गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे ऑनलाइन मॉडल को खास तौर पर बड़े मेट्रो शहरों में बेहतर बनाने पर ध्यान देंगे। यह कदम ऑनलाइन सेगमेंट में तेजी से विस्तार करने की बजाय कैपिटल एफिशिएंसी पर जोर देने का संकेत देता है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों का बदलता ट्रेंड
आजकल रिटेल सेक्टर में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर मिल रही है। ये सेवाएं, खासकर शहरी इलाकों में, ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं। DMart ने कुल बिल कट 13.4% बढ़ाकर 110 मिलियन कर लिया है, जो दिखाता है कि ग्राहक अभी भी स्टोर्स पर आ रहे हैं। लेकिन, प्रति स्क्वायर फुट सालाना रेवेन्यू में 2.4% की मामूली गिरावट आई है, जो ₹8,571 हो गया है। इसका मतलब है कि ग्राहक स्टोर पर तो आ रहे हैं, लेकिन उनका खर्च करने का तरीका बदल रहा है।
फाइनेंशियल आंकड़े बताते हैं कि जनरल मर्चेंडाइज और अपैरल का प्रोडक्ट मिक्स 24.7% से बढ़कर 25.5% हो गया है, जबकि फूड्स अभी भी 54.9% के साथ सबसे बड़ा रेवेन्यू कंट्रीब्यूटर है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या यह प्रोडक्ट मिक्स में सुधार कंपनी को बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने में मदद कर पाएगा। निवेशकों की नजरें अब नए स्टोर्स से आने वाले रेवेन्यू और सिमट चुके DMart Ready मॉडल के कंपनी की कुल प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ने वाले असर पर रहेंगी।
