Avenue Supermarts ने जून तिमाही में **15%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन मेट्रो शहरों के स्टोर्स में ग्रोथ लगभग ठप है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता कंपनी के ट्रेडिशनल रिटेल मॉडल के लिए एक चुनौती बन गई है। अब निवेशक इस बदलाव का सेम-स्टोर सेल्स और मुनाफे पर असर का आंकलन कर रहे हैं।
DMart चलाने वाली कंपनी Avenue Supermarts का जून तिमाही में रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 15% बढ़ा है। कंपनी ने जनरल मर्चेंडाइज और कपड़ों की बिक्री से अपने ग्रॉस मार्जिन में 45 बेसिस पॉइंट का सुधार किया। हालांकि, कर्मचारी खर्चों में 30% की बढ़ोतरी के कारण इस लाभ पर असर पड़ा, जिससे कंपनी की मुख्य ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी (EBITDA मार्जिन) में मामूली ग्रोथ दर्ज की गई।
मेट्रो शहरों में धीमी ग्रोथ
तिमाही नतीजों में सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुराने और स्थापित बाजारों में सेल्स ग्रोथ धीमी पड़ गई है। एक साल से ज्यादा समय से खुले स्टोर्स की सेल्स ग्रोथ घटकर 5.5% रह गई है, जो पिछली तिमाही में 10.8% थी। यह दर्शाता है कि बड़े शहरों में स्थापित स्टोर्स पर ग्राहकों की आवाजाही और खर्च पर दबाव बढ़ रहा है।
क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर
भारतीय रिटेल बाजार में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। इन सेवाओं ने ग्राहकों के शॉपिंग के तरीके को बदल दिया है। अब लोग छोटी-मोटी चीजें तुरंत डिलीवर करवाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि DMart का ट्रेडिशनल मॉडल बड़े बास्केट वाली शॉपिंग पर फोकस करता रहा है। यह बदलाव खासकर बड़े मेट्रो शहरों में ज्यादा दिख रहा है, जहां क्विक कॉमर्स की प्रतिस्पर्धा चरम पर है।
DMart की ऑनलाइन स्ट्रैटेजी में बदलाव
इस बदलते माहौल को देखते हुए DMart ने अपनी ऑनलाइन स्ट्रैटेजी में भी बदलाव किया है। कंपनी ने अपने DMart Ready प्लेटफॉर्म का विस्तार घटा दिया है, जो अब 11 शहरों में काम कर रहा है, जबकि पहले यह 25 शहरों में फैला हुआ था। इससे यह साफ है कि मैनेजमेंट ऑनलाइन सेगमेंट में व्यापक उपस्थिति की बजाय मुनाफे और कोर स्टोर की एफिशिएंसी पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
इन नतीजों के बाद फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की राय बंटी हुई है। कुछ ब्रोकर्स कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल को लेकर उत्साहित हैं। Motilal Oswal और Axis Securities का मानना है कि DMart की एफिशिएंट कॉस्ट स्ट्रक्चर और स्टोर्स के विस्तार की योजनाएं अगले कुछ सालों में ग्रोथ को बढ़ावा देंगी।
वहीं, दूसरी ओर, कुछ ग्लोबल फर्म्स ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। JPMorgan ने कमजोर सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ का हवाला देते हुए टारगेट प्राइस घटा दिया है। Goldman Sachs रेवेन्यू में नरमी और बढ़ते ऑपरेटिंग खर्चों को लेकर चिंतित है। Citi ने भी अपने अर्निंग एस्टिमेट्स को नीचे किया है। Jefferies का मानना है कि क्विक कॉमर्स का उभार एक स्ट्रक्चरल चुनौती है, जिससे कंपनी को अपनी मार्केट हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए निपटना होगा।
निवेशकों के लिए आगे सबसे अहम यह देखना होगा कि कंपनी अपने मेट्रो स्टोर्स में सेल्स को स्थिर कर पाती है या नहीं और साथ ही अपने फिजिकल स्टोर्स का विस्तार करते हुए ऑपरेटिंग कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है।
