Avenue Supermarts, जो DMart सुपरमार्केट चेन चलाती है, अब दवाइयों के रिटेल बिज़नेस में उतर गई है। कंपनी ने मुंबई के कुछ स्टोर्स में एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया है, जहाँ दवाओं पर **20%** का फ्लैट डिस्काउंट दिया जा रहा है। अपनी सहायक कंपनी Reflect Healthcare and Retail Private Limited के ज़रिए, DMart अपने मौजूदा स्टोर स्पेस का इस्तेमाल करके हाई-मार्जिन वाले फार्मेसी सेक्टर में कदम रख रही है।
DMart का नया बिज़नेस: फार्मेसी रिटेल
Avenue Supermarts, जो अपने पॉपुलर DMart सुपरमार्केट के लिए जानी जाती है, ने अब फार्मेसी रिटेल मार्केट में एंट्री कर ली है। कंपनी फिलहाल मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के कुछ चुनिंदा स्टोर्स में एक पायलट प्रोग्राम चला रही है। यह नई सर्विस पूरी तरह से कंपनी की सब्सिडियरी Reflect Healthcare and Retail Private Limited द्वारा मैनेज की जा रही है, और इसमें सभी दवाओं पर 20% का फ्लैट डिस्काउंट दिया जा रहा है।
'शॉप-इन-शॉप' मॉडल का इस्तेमाल
DMart ने नए, अलग स्टोर खोलने के बजाय 'शॉप-इन-शॉप' स्ट्रेटेजी अपनाई है। यानी, अपने हाई-फुटफॉल वाले हाइपरमार्केट के अंदर ही फार्मेसी काउंटर लगाए गए हैं। इससे कंपनी को नई रियल एस्टेट खरीदने या किराए पर लेने का भारी खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। यह तरीका DMart को अपने बड़े कस्टमर बेस तक बिना अतिरिक्त मार्केटिंग या कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट के सीधे पहुंचने का मौका देता है। कंपनी इस नए सेगमेंट में भी अपने 'एवरीडे-लो-प्राइसिंग' मॉडल को लागू कर रही है, जो फार्मेसी रिटेल सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव है।
वित्तीय और कॉम्पिटिटिव पहलू
फार्मास्युटिकल रिटेल बिज़नेस में आमतौर पर ग्रॉस मार्जिन काफी ज़्यादा होता है। ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं पर यह 25% से 30% तक हो सकता है, जबकि DMart का कोर किराना बिज़नेस 7% से 8% ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर चलता है। मार्जिन ज़्यादा होने के बावजूद, इसमें ऑपरेशनल जटिलताएं भी काफी हैं। फार्मेसी चलाने के लिए हजारों अलग-अलग स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स (SKUs) को मैनेज करना पड़ता है, ताकि कस्टमर अपनी ज़रूरत का सामान एक ही बार में ढूंढ सकें।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत में फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन काफी बिखरी हुई है, जिसमें कई मैन्युफैक्चरर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स शामिल हैं। इस सेक्टर में सफलता कंपनी की इन्वेंटरी मैनेजमेंट और विभिन्न दवाओं की लॉजिस्टिक्स को संभालने की एफिशिएंसी पर निर्भर करेगी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि 20% का डिस्काउंट काफी आक्रामक है, लेकिन इस मॉडल की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी हाई सेल्स वॉल्यूम बनाए रखने और स्पेशलाइज्ड सप्लाई चेन की कॉस्ट को मैनेज करने पर निर्भर करेगी।
भविष्य की प्रगति पर नज़र
निवेशकों के लिए, इस पायलट प्रोग्राम के नतीजों पर नज़र रखना सबसे अहम होगा। कंपनी ने अभी तक इसे पूरे देश में कब तक फैलाया जाएगा, इसकी कोई टाइमलाइन नहीं दी है। इस कदम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या DMart अपनी हाई स्टोर एफिशिएंसी बनाए रखते हुए फार्मेसी बिज़नेस की सख्त रेगुलेटरी और इन्वेंटरी ज़रूरतों को पूरा कर पाती है। मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर भी नज़र रखेंगे कि लोकल फार्मेसी ओनर्स और बड़े ऑनलाइन फार्मेसी प्लेयर्स इस बढ़ी हुई प्राइस कॉम्पिटिशन पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। स्टोर-लेवल परफॉरमेंस, एक्सपैंशन की स्पीड और कंपनी के ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाला असर यह बताएगा कि क्या यह नया सेगमेंट सफलतापूर्वक स्केल कर पाएगा।
