DMART के नतीजे: रेवेन्यू चमका, पर इन वजहों से गिरी चाल
Avenue Supermarts, जो DMART के नाम से जानी जाती है, ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में ₹17,683.86 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 19% ज्यादा है। कंपनी ने इस दौरान 500 स्टोर्स का अहम पड़ाव भी पार कर लिया। कंपनी के EBITDA मार्जिन में 7.2% तक का मामूली सुधार देखा गया, जो पिछले साल से 37 बेसिस पॉइंट ज्यादा है।
कर्ज़ और इन्वेंटरी की बढ़ती चिंता
इन मजबूत टॉप-लाइन नंबर्स के बावजूद, निवेशकों की नजर कंपनी पर बढ़ते वित्तीय दबावों पर है। सबसे बड़ी चिंता बढ़ते कर्ज़ (Debt) और इन्वेंटरी (Inventory) को लेकर है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कुल कर्ज़ बढ़कर ₹2,267 करोड़ हो गया, जो FY25 के ₹693 करोड़ से काफी ज्यादा है। इसके चलते डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.09 पर पहुंच गया है। वहीं, इन्वेंटरी टर्नओवर घटकर 12.8 रह गया, जो FY25 में 13.6 था। इसका मतलब है कि कंपनी का पैसा लंबे समय तक इन्वेंटरी में फंसा रह रहा है। इन वजहों से रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RoNW) 13.5% (पिछले साल 14.1%) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (RoCE) 17.1% (पिछले साल 17.8%) तक गिर गया है।
मार्केट का रिएक्शन और वैल्यूएशन
इन चिंताओं के कारण, नतीजों के बाद DMART का स्टॉक करीब 5% तक गिर गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि DMART का मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) भी एक बड़ी वजह है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 100x के आसपास बना हुआ है, जो Reliance Industries के रिटेल आर्म (करीब 24x P/E) और Trent Ltd. (लगभग 85x P/E) जैसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी अधिक है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
बाजार विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। CLSA और Morgan Stanley जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने 'Overweight' या 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस क्रमशः ₹6,628 और ₹5,188 दिए हैं। वहीं, Emkay Global ने 'Sell' रेटिंग के साथ ₹3,700 का टारगेट दिया है, उनका मानना है कि क्विक कॉमर्स से मुकाबला और महंगा वैल्यूएशन कंपनी के लिए चुनौती बन सकता है। ICICI Securities ने 'Hold' रेटिंग दी है, उनका कहना है कि हालांकि DMART का लॉन्ग-टर्म एग्जीक्यूशन मजबूत है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन में भविष्य की ग्रोथ पहले से ही शामिल दिख रही है। 30 एनालिस्ट्स का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹4,396.77 है, जो मौजूदा स्तर से ज्यादा बड़ी तेजी की उम्मीद कम दिखाता है।
कॉम्पिटिशन और भविष्य की राह
भारतीय रिटेल सेक्टर में मुकाबला कड़ा होता जा रहा है, खासकर वैल्यू सेगमेंट में। बदलते उपभोक्ता व्यवहार और क्विक कॉमर्स मॉडल के बढ़ते चलन से DMART जैसी स्थापित कंपनियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में, कंपनी के मार्जिन में स्ट्रक्चरल सुधार और स्टोर-लेवल सेल्स का स्थिर होना ही मौजूदा हाई मल्टीपल्स को सही ठहराने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
