Q3 FY'26 के नतीजों में Associated Alcohols & Breweries Limited ने अपने इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) बिजनेस में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव दिखाया है। कंपनी ने Inbrew के साथ अपने लाइसेंसिंग एग्रीमेंट से हटकर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को अपनाया है। इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के रेवेन्यू पर पड़ा, जो पिछले साल की समान अवधि (YoY) की तुलना में ₹56 करोड़ घट गया। इस गिरावट में ₹52 करोड़ की हिस्सेदारी खास तौर पर Inbrew के ट्रांजीशन की है।
लेकिन, इस रेवेन्यू शिफ्ट के बावजूद, कंपनी की ऑपरेशनल परफॉरमेंस और प्रॉफिटेबिलिटी में जबरदस्त उछाल देखा गया। EBITDA में तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 73% का जोरदार इजाफा हुआ और यह ₹42 करोड़ पर पहुंच गया। इससे EBITDA मार्जिन पिछले साल के 12% से बढ़कर 16% हो गया। कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में भी भारी सुधार हुआ, जो QoQ 36% से बढ़कर 46% हो गया। यह नरमी वाले कच्चे माल की कीमतों और बाय-प्रोडक्ट्स से बेहतर रियलाइजेशन का नतीजा था। कंपनी का बॉटम लाइन, यानी नेट प्रॉफिट (PAT), भी 95% QoQ बढ़कर ₹27 करोड़ रहा, जिससे PAT मार्जिन 10% पर पहुंचा।
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) में, कंपनी ने कुल ₹781 करोड़ का नेट रेवेन्यू दर्ज किया, जिसमें EBITDA ₹103 करोड़ और PAT ₹65 करोड़ रहा। कंपनी की ग्रोथ का मुख्य इंजन उसका अपना (proprietary) IMFL सेगमेंट है। इसके वॉल्यूम में 32% YoY की ग्रोथ आई, जो 1.7 मिलियन केस तक पहुंच गया, और रेवेन्यू 30% YoY बढ़कर ₹127 करोड़ हो गया। वहीं, लाइसेंस्ड IMFL के वॉल्यूम में 27% और रेवेन्यू में 30% YoY की गिरावट आई, जो बिजनेस मॉडल के बदलाव को साफ दर्शाता है।
मैनेजमेंट का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रिपोर्टेड रेवेन्यू, फाइनेंशियल ईयर 2025 के लगभग बराबर रहेगा, जिसके लिए Q4 में दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। कंपनी का मुख्य जोर अपने ब्रांड्स को मजबूत करने पर है, जिसके लिए 30% से 35% YoY की वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्रीमियम सेगमेंट में पैठ बढ़ाना, नए बाजारों में उतरना और ब्रांड वैल्यू को मजबूत करना शामिल है। कंपनी के पास प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की एक स्पष्ट योजना है। H2 FY'26 में रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) 'Kultur' आएगा, जिसके बाद Q1 FY'27 में Tequila और Brandy, और अगले 1.5 सालों में एक प्रीमियम सिंगल माल्ट प्रोडक्ट भी पेश किया जाएगा। माल्ट मैचुरेशन फैसिलिटीज के लिए कैपेसिटी बढ़ाने में भी भारी निवेश हो रहा है; Q3 FY'26 में कैश खरीद पर ₹6 करोड़ खर्च किए गए, और माल्ट प्लांट के लिए करीब ₹100 करोड़ के CAPEX की योजना है।
भौगोलिक विस्तार पर भी कंपनी खास ध्यान दे रही है। झारखंड में एंट्री की योजना है और महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पैन-इंडिया स्तर पर अपनी पहुंच बनाने के लिए, कंपनी अधिग्रहण के अवसरों की भी सक्रिय रूप से तलाश कर रही है। इसमें केरल में NCLT रूट के माध्यम से अधिग्रहण के लिए आवेदन और उत्तर प्रदेश में जमीन खरीदने की प्रक्रिया शामिल है।
एथेनॉल बिजनेस में बाजार में अतिरिक्त सप्लाई के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं, इसलिए कंपनी ने अपने मुख्य एल्कोहब (alcobev) बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। मैनेजमेंट को अगले 1-1.5 सालों में नए प्रीमियम उत्पादों के तैयार होने पर मार्जिन में स्थिरता और आगे ग्रोथ की उम्मीद है। इसके अलावा, कंपनी EU-India ट्रेड एग्रीमेंट के संभावित प्रभाव पर भी नजर रख रही है, जो इंडस्ट्री बेंचमार्क और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।