Asian Paints एक नई और मज़बूत चुनौती का सामना कर रही है, और इसके जवाब में कंपनी ने अपनी 'क्षेत्रीय रणनीति' (regionalization strategy) को और मज़बूत करने का फैसला किया है। कंपनी अब खास तौर पर हर इलाके की स्थानीय पसंद के रंगों और वॉटरप्रूफिंग (waterproofing) समाधानों पर ज़ोर दे रही है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि Birla Opus और JSW Paints जैसे नए खिलाड़ी बाज़ार में तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं।
कॉम्पिटिशन का बढ़ता दबाव
Birla Opus, आदित्य बिड़ला ग्रुप का एक बड़ा दांव, तेज़ प्राइसिंग (pricing) और डीलर इंसेंटिव्स (dealer incentives) के ज़रिए बाज़ार में तेज़ी से पैठ बना रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे 8,000 से ज़्यादा शहरों तक पहुंच चुके हैं और 2025 के अंत तक सिंगल-डिजिट मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य है।
वहीं, JSW Paints ने तो बाज़ी ही पलट दी है। दिसंबर 2025 में, इन्होंने AkzoNobel India (जो Dulux ब्रांड की मालिक थी) को लगभग ₹9,000 करोड़ में खरीद लिया। इस बड़ी डील के बाद JSW Paints का नेटवर्क 29,000 डीलरों तक पहुंच गया है और उनका लक्ष्य FY26 तक 10% मार्केट शेयर और ₹7,000 करोड़ का रेवेन्यू प्लेटफॉर्म खड़ा करना है। AkzoNobel India पहले से ही 5-7% मार्केट शेयर के साथ चौथे नंबर पर थी।
भारतीय डेकोरेटिव पेंट मार्केट, जिसका मूल्य 2024 में ₹1.35 ट्रिलियन था, 2030 तक 9.28% की CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) से बढ़ने का अनुमान है। इस तेज़ ग्रोथ के माहौल में, कंपनियां बाज़ार हिस्सेदारी (market share) झपटने की होड़ में हैं।
Asian Paints की रणनीति और वैल्यूएशन पर सवाल
Asian Paints के MD & CEO अमित सिंगल (Amit Syngle) ने इस क्षेत्रीय रणनीति को 'ग्राहक-केंद्रित' (customer-centric) बताया है, जो कंपनी को भविष्य में मज़बूती देगी। यह स्ट्रेटेजी फिलहाल शुरुआती दौर में है और आने वाले महीनों में इसे और राज्यों में लागू किया जाएगा। कंपनी का मुख्य लक्ष्य अपने 50% से ज़्यादा के डोमिनेंट मार्केट शेयर को बचाए रखना है।
लेकिन, इस तेज़ कॉम्पिटिशन के बीच Asian Paints की वैल्यूएशन (valuation) पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी का P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो फरवरी 2026 में लगभग 52.6 से 59.9 के बीच रहा, जो कि एक प्रीमियम वैल्यूएशन माना जाता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हालिया रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ में आई मंदी के दौर में यह वैल्यूएशन टिकाऊ नहीं रह सकता।
हालिया नतीजों की बात करें तो, Q3 FY26 में Asian Paints का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 4.6% गिरा, हालांकि रेवेन्यू 4% बढ़ा। वहीं, भारत के डेकोरेटिव पेंट बिजनेस में 8% वॉल्यूम ग्रोथ देखी गई।
मार्जिन पर दबाव का ख़तरा
Birla Opus की आक्रामक प्राइसिंग के चलते Asian Paints का मार्केट शेयर सितंबर 2025 तक 59% से घटकर 52% हो गया, जबकि Birla Opus ने लगभग 6.6% शेयर हथिया लिया।
JSW Paints द्वारा AkzoNobel के अधिग्रहण और रॉयल्टी पेमेंट से बची रकम को प्राइस कट्स (price cuts) और डीलर स्कीमों में लगाने की योजना, मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकती है। Asian Paints का लक्ष्य भले ही टॉपलाइन ग्रोथ हो, लेकिन आक्रामक कीमत वाली रणनीतियों से मुकाबला करने के लिए मार्केटिंग खर्च और प्रमोशनल एक्टिविटीज़ (promotional activities) बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (जो Q3FY26 में 20% थे) पर असर पड़ सकता है।
हालांकि Asian Paints के पास मज़बूत फाइनेंशियल मैट्रिक्स (metrics) हैं, जैसे 26.37% का ROE (Return on Equity) और 35.74% का ROCE (Return on Capital Employed), लेकिन पिछले तीन सालों में इसका रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ क्रमशः 5.47% और 4.57% रहा है, जो तेज़ होते कॉम्पिटिशन के सामने इसकी क्षमता पर सवाल खड़े करता है।
भविष्य का नज़रिया
आगे चलकर, Indian Paints इंडस्ट्री 2030 तक ₹2.29 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। Asian Paints की क्षेत्रीय रणनीति और होम डेकोर (home decor) जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार की योजनाएं उपभोक्ता की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन, JSW Paints और Birla Opus की आक्रामक चालों के बीच, मार्केट शेयर की लड़ाई और मज़बूत होगी। कंपनी को इनोवेशन (innovation) और प्रीमियम ऑफरिंग्स (offerings) के ज़रिए अपनी पकड़ बनाए रखनी होगी।
प्रीमियम वैल्यूएशन (premium valuation) को बनाए रखने के लिए, Asian Paints को लगातार वॉल्यूम ग्रोथ और ऑपरेटिंग मार्जिन की सुरक्षा करनी होगी, जो इस बदलते बाज़ार में एक नाज़ुक संतुलन का काम करेगा।