Lahori Zeera बनाने वाली कंपनी Archian Foods अब एसेट-लाइट मॉडल की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने अब तक **$38.6 मिलियन** की फंडिंग जुटाई है और अब वह अपने मशहूर **₹10** वाले प्राइस पॉइंट को बरकरार रखते हुए दूसरे फ्लैगशिप प्रोडक्ट की तलाश में है।
एसेट-लाइट मॉडल की ओर कदम
Lahori Zeera ब्रांड की पैरेंट कंपनी Archian Foods अपनी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के लिए एसेट-लाइट मॉडल अपना रही है। इस रणनीति के तहत, कंपनी अब खुद बॉटलिंग प्लांट लगाने के बजाय बाहरी को-बॉटलिंग पार्टनर्स (co-bottling partners) के जरिए मैन्युफैक्चरिंग कराएगी। इससे कंपनी का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर के बजाय ब्रांडिंग और नए इनोवेशन पर रहेगा।
फंड की स्थिति और रणनीति
कंपनी के को-फाउंडर निखिल डोढ़ा ने साफ किया है कि इस बदलाव के लिए उन्हें फिलहाल और निवेश की जरूरत नहीं है। Archian Foods ने अब तक $38.6 मिलियन की पूंजी जुटाई है, जिसमें Verlinvest और Motilal Oswal Wealth जैसे बड़े नाम शामिल हैं। बिना ज्यादा कैपिटल खर्च किए, कंपनी अब अपने कैश फ्लो को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है।
ग्लोबल दिग्गजों से मुकाबला
कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो में दूसरे 'हीरो प्रोडक्ट' को जोड़ने की तैयारी में है। हालांकि अभी भी मुख्य फोकस बेवरेज कैटेगरी पर ही है, जिसमें मसाला कोला और शुगर-फ्री ऑप्शन्स भी शामिल किए गए हैं। यह कदम Coca-Cola और PepsiCo जैसे ग्लोबल दिग्गजों को कड़ी टक्कर देने के लिए उठाया गया है, जो खुद भी अब अपने दाम घटाकर मार्केट शेयर बचाने में लगे हैं।
₹10 के दाम का चैलेंज
महंगाई के कारण रॉ मटीरियल और पैकेजिंग की लागत बढ़ने के बावजूद, कंपनी ने अपने ₹10 के एंट्री-लेवल प्राइस पॉइंट को नहीं बदला है। प्रबंधन अभी खुद ही बढ़ती कीमतों का दबाव झेल रहा है ताकि ग्राहकों को बढ़ती महंगाई का असर न पड़े। रेडसीर (Redseer) के डेटा के अनुसार, भारत का रेडी-टू-ड्रिंक मार्केट 2030 तक $40 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है, लेकिन इस बढ़त के बीच कंपनी के लिए मार्जिन और कॉम्पिटिशन को मैनेज करना सबसे बड़ा इम्तिहान होगा।
