Voltas, LG, Samsung और Daikin जैसे बड़े ब्रांड्स ने अक्टूबर में अपने प्रोडक्ट्स के दाम **10%** तक बढ़ा दिए हैं। कच्चे माल (कॉपर, स्टील, एल्युमिनियम) की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है।
त्योहारी सीजन की चमक के बीच कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों ने एक बार फिर अपनी कीमतों में इजाफा कर दिया है। अक्टूबर महीने से लागू हुई इस बढ़ोतरी के साथ, ग्राहक अब एयर कंडीशनर और टेलीविजन जैसे अप्लायंसेज के लिए अधिक पैसे खर्च करेंगे। साल भर की कुल बढ़ोतरी की बात करें तो कुछ कैटेगरीज में दाम 18% तक बढ़ चुके हैं।
मार्जिन और डिमांड का गणित
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालकर अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रख पाएंगी? फेस्टिव सीजन के दौरान डिमांड सबसे ज्यादा होती है। अगर कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं, तो इसका असर बिक्री के वॉल्यूम (Volume) पर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि Voltas, Havells और Blue Star जैसी कंपनियां इन चुनौतियों के बीच अपने ग्रॉस मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारतीय कंपनियों के लिए अभी भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना एक बड़ी चुनौती है। एयर कंडीशनर और टीवी के कई अहम पार्ट्स (जैसे कंप्रेसर और डिस्प्ले मॉड्यूल) अभी भी विदेशों से मंगाए जाते हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कंपनियों की लागत बढ़ रही है। हालांकि, सरकार की PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इस बदलाव में अभी वक्त लगेगा।
