त्योहारी सीजन में भारतीय गारमेंट कंपनियों को जबरदस्त डिमांड की उम्मीद है, लेकिन रॉ-मटेरियल और लेबर कॉस्ट बढ़ने से मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है। ग्राहक की संवेदनशीलता को देखते हुए कंपनियां दाम नहीं बढ़ा पा रही हैं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
त्योहारी सीजन के दौरान भारतीय अपैरल निर्माता जोरदार बिक्री की तैयारी में हैं, लेकिन पर्दे के पीछे चुनौतियां कम नहीं हैं। कॉटन, धागा (yarn), लेबर और पेट्रोकेमिकल से जुड़े रॉ-मटेरियल्स की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के मार्जिन को कस दिया है।\n\n### मार्जिन पर लगाम\n\nभारतीय बाजार में ग्राहक कीमतों को लेकर काफी सतर्क हैं, इसलिए कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं। अधिकांश रिटेलर्स ने केवल 2% से 5% की मामूली बढ़ोतरी की है ताकि मार्केट शेयर बना रहे। V-Mart जैसी कंपनियां इन्वेंट्री मैनेजमेंट और ऑटोमेशन के जरिए इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बरकरार है।\n\n### बदलता बाजार और एक्सपोर्ट का रिस्क\n\nइस सीजन में एथनिक वियर की सबसे ज्यादा डिमांड है। साथ ही, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स अब बाजार का 12% हिस्सा कब्जा चुके हैं, जिससे कंपनियों को फिजिकल स्टोर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच तालमेल बिठाना पड़ रहा है।\n\nवहीं, ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों ने एक्सपोर्ट करने वाली गारमेंट कंपनियों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। साल 2026 की शुरुआत में ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत के कारण एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्लेयर्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। निवेशकों को अब कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री पर नज़र रखनी होगी, खासकर इन्वेंट्री लेवल और रॉ-मटेरियल की कीमतों के ट्रेंड पर।
