बढ़ती लागत और लेबर की कमी से निपटने के लिए Page Industries और KPR Mill जैसी दिग्गज कंपनियां अपने मैन्युफैक्चरिंग हब को ओडिशा, बिहार और झारखंड में शिफ्ट कर रही हैं। हालांकि, अगस्त 2026 में देश का कुल अपैरल प्रोडक्शन **7.4%** तक गिर गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
भारत के गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स अब एक नई राह तलाश रहे हैं। बेंगलुरु, तिरुपुर और NCR जैसे पुराने मैन्युफैक्चरिंग हब में बढ़ती सैलरी और लेबर की समस्या के चलते, कंपनियां अब ओडिशा, बिहार और झारखंड की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
क्यों हो रहा है ये शिफ्ट?
कंपनियों का मुख्य मकसद यहां उपलब्ध सस्ते लेबर और राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उठाना है। इसमें बिजली से लेकर कैपिटल इन्वेस्टमेंट तक पर भारी छूट मिल रही है।
- Page Industries: कंपनी ने ओडिशा के कटक में एक बड़ा प्लांट लगाया है, जिसमें ₹750 करोड़ का निवेश किया गया है।
- KPR Mill: कंपनी ने ₹450 करोड़ का निवेश करके ओडिशा में नई यूनिट शुरू की है, जो उनके कुल ₹1,225 करोड़ के एक्सपेंशन प्लान का हिस्सा है।
- अन्य खिलाड़ी: Gokaldas Exports और Pearl Global Industries भी अपनी ऑपरेशनल स्टेबिलिटी के लिए इसी मॉडल को अपना रहे हैं।
मार्केट में अभी क्या है हाल?
अगस्त 2026 के ताजा डेटा के मुताबिक, देश में गारमेंट प्रोडक्शन में 7.4% की गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़े घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में मांग की कमजोरी को दर्शाते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जहां टेक्सटाइल इंडस्ट्री (कच्चा माल) में 13.1% की ग्रोथ देखी गई, वहीं गारमेंट सेक्टर फिलहाल वॉल्यूम बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
हालांकि नया विस्तार भविष्य के लिए अच्छा है, लेकिन नई जगहों पर लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बनी रहेंगी। कच्चे माल की ढुलाई और नई यूनिट्स की एफिशिएंसी को पुराने प्लांट्स के स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती होगी। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि ये कंपनियां कितनी जल्दी अपनी नई फैसिलिटीज को फुल कैपेसिटी पर चला पाती हैं और क्या इसका फायदा आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स में दिखता है या नहीं।
