Apollo Pipes के शेयरों ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। पिछले साल के निचले स्तर से **163%** का जबरदस्त उछाल दिखाते हुए, शेयर ₹664.95 के स्तर पर पहुंच गए हैं। इस तेजी का मुख्य कारण प्रमोटरों और बड़े निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना है। हालांकि, कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों में कच्चे माल की कीमतों के कारण घाटा भी सामने आया है।
Apollo Pipes में क्या खास?
Apollo Pipes Limited के शेयर मंगलवार को ₹664.95 के नए शिखर पर पहुंच गए। यह पिछले 52 हफ्तों के निम्नतम स्तर ₹252.80 से एक शानदार वापसी है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है। इस 163% की रैली के पीछे कंपनी के मैनेजमेंट और बड़े निवेशकों के हालिया कदम हैं।
प्रमोटरों का भरोसा बढ़ा
कंपनी के प्रमोटर ग्रुप, जिसमें S Gupta Holding Private Limited और श्री ध्रुव गुप्ता शामिल हैं, ने अगस्त में ओपन मार्केट से 3.06% अधिक शेयर खरीदे। इसके बाद, कंपनी में उनकी कुल हिस्सेदारी बढ़कर 54.78% हो गई है। इतना ही नहीं, बड़े निवेशक मुकुल महावीर अग्रवाल के पास भी 1.5 करोड़ शेयर हैं, जो कंपनी में 3.41% हिस्सेदारी रखते हैं। ये कदम अक्सर कंपनी के भविष्य के प्रति विश्वास का संकेत माने जाते हैं।
तिमाही नतीजे और चुनौतियां
जहां एक ओर शेयर रॉकेट की तरह भाग रहे हैं, वहीं कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजे मिले-जुले हैं। जून 2026 को समाप्त तिमाही में Apollo Pipes को ₹8.57 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) हुआ है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹295.43 करोड़ रहा। इस घाटे की मुख्य वजह कच्चे माल, जैसे पॉलीमर और पीवीसी रेजिन की कीमतों में आई भारी उठा-पटक है, जिससे कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ा है।
भविष्य की योजनाएं और जोखिम
आगे चलकर, कंपनी अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को अगले दो सालों में 240,000 टन से बढ़ाकर 288,000 टन करने की योजना बना रही है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर और जल प्रबंधन की बढ़ती मांग को भुनाने के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि, इस विस्तार की सफलता कंपनी की अपनी नकदी और कर्ज प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
निवेशक इस समय मिली-जुली भावनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं। स्टॉक में तेजी के बावजूद, कंपनी को इंडस्ट्री की कड़ी प्रतिस्पर्धा और अपनी सब्सिडियरी Kisan Mouldings Limited के प्रदर्शन के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है। प्लास्टिक और रेजिन की कीमतों पर निर्भरता के कारण, प्रॉफिट मार्जिन वैश्विक कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं।
भविष्य में, निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनी कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता आने पर अपने प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर रख पाती है, और क्या वह अपनी सब्सिडियरी और नई कैपेसिटी का सफलतापूर्वक एकीकरण कर पाती है। अगले तिमाही के नतीजों पर भी सबकी नजरें रहेंगी कि क्या मांग में आई रिकवरी बॉटम-लाइन पर मजबूत प्रदर्शन में तब्दील होती है।
