Amrut Distilleries की सेल 2030 तक स्थिर रहने का अनुमान है। सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए जरूरी 3 साल की एजिंग प्रक्रिया के कारण कंपनी सप्लाई बढ़ाने में असमर्थ है। बढ़ते इम्पोर्टेड स्कॉच के मुकाबले में कंपनी अब ब्लेंडेड माल्ट और नए सेगमेंट पर फोकस कर रही है।
भारत के प्रीमियम व्हिस्की बाजार में मशहूर Amrut Distilleries ने साल 2030 तक अपनी बिक्री स्थिर रहने का संकेत दिया है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रक्षित जगदाले के अनुसार, विकास की राह में बाधा डिमांड की कमी नहीं, बल्कि मैच्योर सिंगल माल्ट इन्वेंट्री की कमी है।
क्यों कम पड़ रहा माल?
सिंगल माल्ट व्हिस्की को तैयार करने के लिए बैरल में कम से कम 3 साल तक एजिंग की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कंपनी ने अपनी डिस्टिलेशन क्षमता को 1.4 मिलियन लीटर तक बढ़ा तो लिया है, लेकिन仓库 में मौजूद मौजूदा स्टॉक को मैच्योर होने में समय लग रहा है। फिलहाल कंपनी के पास लगभग 75,000 नौ-लीटर केसेस की इन्वेंट्री है, जो मांग के मुकाबले काफी कम है।
स्कॉच से बढ़ती चुनौती
इन्वेंट्री के साथ-साथ बाजार में कॉम्पिटिशन भी तगड़ा हो गया है। भारत में इम्पोर्टेड स्कॉच की बढ़ती खेप और कुछ क्षेत्रों में कम इम्पोर्ट ड्यूटी ने घरेलू प्रीमियम ब्रांड्स पर दबाव बना दिया है। ऐसे में भारतीय डिस्टिलर्स को अब अपनी प्राइसिंग और स्ट्रेटेजी फिर से तय करनी पड़ रही है।
कंपनी का नया दांव
इस चुनौती से निपटने के लिए, Amrut अब ब्लेंडेड माल्ट व्हिस्की की तरफ कदम बढ़ा रही है, जिसमें सिंगल माल्ट के मुकाबले कम एजिंग की जरूरत होती है। साथ ही, दिसंबर में कंपनी 'Fusion' लेबल से सस्ता सिंगल माल्ट ब्रांड लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके अलावा, कंपनी भारत में टेकीला जैसे इंटरनेशनल स्पिरिट्स लाने की संभावनाएं भी तलाश रही है। हालांकि Amrut एक प्राइवेट कंपनी है, लेकिन इसकी यह रणनीति पूरे भारतीय शराब उद्योग (Alcobev Industry) के बदलते दौर की एक बड़ी मिसाल है।
