Amazon India ने अपनी लॉजिस्टिक ताकत को और मजबूत करने का फैसला किया है। कंपनी Zepto और Blinkit जैसे क्विक-कॉमर्स दिग्गजों को टक्कर देने के लिए देश भर में **1,000** से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर्स खोल रही है।
भारत के ई-कॉमर्स मार्केट में कॉम्पिटिशन अब पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गया है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म्स ने कम समय में छोटी शॉपिंग की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे निपटने के लिए Amazon अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, भले ही Amazon का मंथली एक्टिव यूजर बेस 20% है, लेकिन कंपनी का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में 26% का बड़ा हिस्सा है, जो बताता है कि महंगी और टिकाऊ चीजों की खरीदारी के लिए लोग अभी भी Amazon को ही चुन रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर की जंग
Amazon ने अपने 'Amazon Now' सर्विस को विस्तार देते हुए 100 शहरों में 1,000 से ज्यादा माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर्स का नेटवर्क तैयार किया है। कंपनी अब 'अर्बन फुलफिलमेंट सेंटर्स' पर भी जोर दे रही है ताकि प्रोडक्ट्स की डिलीवरी तेजी से हो सके। यह कदम सीधे तौर पर क्विक-कॉमर्स की स्पीड को चुनौती देने के लिए उठाया गया है।
फाइनेंशियल सेहत का हाल
FY26 में Amazon Seller Services का रेवेन्यू ₹34,967 करोड़ रहा, जो कि 15% की ग्रोथ है। कंपनी ने अपना नेट लॉस घटाकर ₹389.9 करोड़ कर लिया है, जो मुनाफे की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है। वहीं, AWS India की बात करें तो यहाँ भी शानदार परफॉर्मेंस रही। कंपनी का रेवेन्यू ₹20,225.6 करोड़ रहा (ग्रोथ 21%), जबकि नेट प्रॉफिट 10 गुना से ज्यादा बढ़कर ₹242.8 करोड़ तक पहुंच गया है।
निवेशकों के लिए रिस्क और मॉनिटरिंग
आक्रामक विस्तार से शॉर्ट-टर्म ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में भारी डिस्काउंटिंग और लॉजिस्टिक खर्चों की होड़ लगी है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या Amazon इस भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद अपने मुनाफे की राह को बनाए रख पाती है या नहीं।
