Amazon Now का बड़ा दांव: **$1 अरब** सेल्स के बाद अब **300** शहरों में होगा विस्तार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Amazon Now का बड़ा दांव: **$1 अरब** सेल्स के बाद अब **300** शहरों में होगा विस्तार

Amazon India अपनी क्विक-कॉमर्स सर्विस Amazon Now को बड़े स्तर पर फैलाने की तैयारी में है। मौजूदा **120** शहरों के बाद अब कंपनी **300** शहरों तक पहुंच बनाने जा रही है, जिसके लिए **2030** तक **$3 अरब** के भारी निवेश की योजना है।

Amazon India तेजी से अपने क्विक-कॉमर्स विंग, Amazon Now को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है। कंपनी का लक्ष्य अपनी 'डिलीवरी-इन-मिनट्स' सर्विस को देश के 300 शहरों तक ले जाना है, जो अभी 120 शहरों तक सीमित है। इस विस्तार को सपोर्ट करने के लिए कंपनी ने करीब 800 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है।

कारोबार का गणित

कंपनी ने $1 अरब से ज्यादा की एनुअलाइज्ड ग्रॉस सेल्स हासिल कर ली है, जो भारत में इंस्टेंट डिलीवरी की बढ़ती डिमांड को दिखाता है। अपनी इस ग्रोथ को बरकरार रखने के लिए Amazon ने 2030 तक भारतीय ऑपरेशंस में $3 अरब के निवेश का रोडमैप तैयार किया है। इस फंड का बड़ा हिस्सा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में लगाया जाएगा ताकि मार्केट में मौजूद कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया जा सके।

क्विक-कॉमर्स की चुनौतियां

हालांकि यह विस्तार बड़ा दिख रहा है, लेकिन क्विक-कॉमर्स का बिजनेस मॉडल काफी महंगा है। छोटे वेयरहाउस और डिलीवरी पार्टनर्स की लंबी फौज को मेंटेन करने में भारी खर्च आता है, जबकि ऑर्डर वैल्यू अभी भी कम बनी हुई है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस महंगे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सस्टेनेबल बनाने और लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की है।

भारतीय निवेशकों के लिए मायने

निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि Amazon का भारतीय बिजनेस NSE या BSE पर लिस्टेड नहीं है। लेकिन, Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto जैसे खिलाड़ियों के साथ इस सेक्टर में बढ़ती जंग का असर भारतीय रिटेल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर साफ दिख रहा है। यह प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में मार्जिन प्रेशर पैदा कर सकती है, जिस पर रिटेल और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर के निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

रेगुलेटरी और रिस्क फैक्टर्स

ऑपरेशनल खर्च के अलावा, विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए रेगुलेटरी नियम भी एक बड़ा मुद्दा हैं। छोटे ऑफलाइन रिटेलर्स पर असर और बिजनेस मॉडल की सस्टेनेबिलिटी को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अंत में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तेजी से डिलीवरी का यह मॉडल एक स्थायी बदलाव बनेगा या फिर कंपनी को रेगुलेटरी दबावों के बीच अपने ऑपरेशंस में बदलाव करना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.