Amazon India का बड़ा दांव: 'Creator Connections' प्रोग्राम से इन्फ्लुएंसर्स की होगी बंपर कमाई

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Amazon India का बड़ा दांव: 'Creator Connections' प्रोग्राम से इन्फ्लुएंसर्स की होगी बंपर कमाई

Amazon India ने अपने 1.65 लाख क्रिएटर्स के लिए 'Creator Connections' प्रोग्राम लॉन्च किया है। इसके जरिए क्रिएटर्स अब सेल्स के साथ-साथ क्लिक (Cost-per-click) से भी कमाई कर सकेंगे। कंपनी का फोकस उन नॉन-मेट्रो शहरों पर है, जहां से कुल क्रिएटर-लेड खरीदारी का **70%** हिस्सा आता है।

कमाई का नया मॉडल

Amazon India का यह नया इनिशिएटिव कंटेंट क्रिएटर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कंपनी इस प्रोग्राम को फेज्ड तरीके से रोल आउट कर रही है, जिसकी शुरुआत 5,000 सिलेक्टेड क्रिएटर्स के साथ की गई है। इस नए मॉडल के तहत, अब इन्फ्लुएंसर्स को सिर्फ सेल्स पर मिलने वाले एफिलिएट कमीशन पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें उनके कंटेंट पर आने वाले हर क्लिक के लिए भी पेमेंट मिलेगा।

नॉन-मेट्रो मार्केट्स पर कंपनी का फोकस

कंपनी के इंटरनल डेटा के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर होने वाली क्रिएटर-ड्रिवेन खरीदारी का करीब 70% हिस्सा बड़े महानगरों के बाहर से आता है। अब तक बड़ी ब्रांड डील्स सिर्फ मेट्रो शहरों के बड़े इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित थीं, लेकिन Amazon अब 50,000 से ज्यादा एडवरटाइजर्स को छोटे और रीजनल क्रिएटर्स के साथ ऑटोमेटेड तरीके से जोड़ रही है। इससे उन क्रिएटर्स को भी मौका मिलेगा जो लाइफस्टाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और होम गुड्स में अपना कंटेंट बनाते हैं।

इन्फ्लुएंसर इकोनॉमिक्स में बदलाव

पारंपरिक रूप से, क्रिएटर्स या तो फिक्स्ड-फी स्पॉन्सरशिप लेते थे या फिर सिर्फ सेल्स कन्वर्जन पर आधारित कमीशन। नया 'कॉस्ट-पर-क्लिक' (CPC) मॉडल एक मिडिल ग्राउंड तैयार करता है। हालांकि, यह मॉडल क्रिएटर्स के लिए थोड़ा रिस्की भी हो सकता है, क्योंकि अगर कंटेंट पर एंगेजमेंट कम रहा, तो कमाई फिक्स्ड-फी वाले मॉडल्स के मुकाबले कम या अस्थिर हो सकती है।

त्योहारी सीजन की तैयारी

ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण है। फेस्टिव सीजन के दौरान इन्फ्लुएंसर-लेड डिस्कवरी से सेल में भारी उछाल आता है। Amazon का यह कदम सोशल कॉमर्स और अन्य ई-कॉमर्स प्रतिस्पर्धियों के सामने अपनी पकड़ मजबूत करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि कंपनी का एल्गोरिदम मैचिंग सिस्टम कितनी कुशलता से क्रिएटर्स की पसंद और ब्रांड्स की जरूरतों को बैलेंस करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.