त्योहारी सीजन में ऑर्डर के दबाव को संभालने के लिए Amazon India ने **400** शहरों में **1.6 लाख** लोगों को काम पर रखा है। यह कदम जहां डिलीवरी क्षमता को मजबूत करेगा, वहीं निवेशक यह देख रहे हैं कि कंपनी अपने बढ़ते खर्चों और घाटे को कैसे मैनेज करती है।
डिमांड पूरी करने की तैयारी
त्योहारी सीजन के दौरान ई-कॉमर्स गतिविधियों में आने वाली भारी उछाल को देखते हुए, Amazon India ने अपनी लॉजिस्टिक्स कमर कस ली है। कंपनी की यह भर्ती प्रक्रिया फुलफिलमेंट सेंटर, सॉर्टिंग फैसिलिटी और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत करेगी। इसके साथ ही, कंपनी अपने 'आश्रय' (Ashray) प्रोग्राम का विस्तार कर रही है, जिसके तहत दिसंबर के अंत तक 250 सेंटर्स पर डिलीवरी पार्टनर्स के लिए क्लाइमेट-कंट्रोल्ड रेस्ट एरिया उपलब्ध कराए जाएंगे।
ग्रोथ बनाम फाइनेंशियल स्थिति
निवेशकों के लिए यह एक्सपेंशन चुनौतीपूर्ण भी है। Amazon Seller Services ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹34,966.8 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 15% अधिक है। हालांकि, मुनाफे की राह में कंपनी को अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि इसी अवधि में कंपनी को ₹389.9 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी में भारी निवेश और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच का संतुलन कंपनी के लिए भविष्य की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।
ग्लोबल और रेगुलेटरी रिस्क
भारत में फेस्टिव डिमांड के बीच, ग्लोबल स्तर पर कंपनी के शेयर (AMZN) दबाव में हैं और 31 अगस्त, 2026 तक इनका भाव लगभग $259.77 के आसपास था। अमेरिका में Federal Trade Commission (FTC) द्वारा विज्ञापन प्रथाओं को लेकर चल रहे संभावित कानूनी मामले भी निवेशकों की चिंता का कारण बने हुए हैं। फिलहाल, भारतीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी की सफलता इस बात पर टिकी है कि वह बिना एक्स्ट्रा कॉस्ट बढ़ाए फेस्टिव रश को कैसे मैनेज करती है।
