Amazon का बड़ा दांव: टियर-2 और टियर-3 शहरों में Prime विस्तार, जानें क्या है पूरा गेम प्लान

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AuthorAditya Rao|Published at:
Amazon का बड़ा दांव: टियर-2 और टियर-3 शहरों में Prime विस्तार, जानें क्या है पूरा गेम प्लान

Amazon अब भारत के छोटे शहरों में अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी के **70%** नए प्राइम (Prime) मेंबर्स इन्हीं छोटे शहरों से आ रहे हैं। इस ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए **₹2,800 करोड़** का निवेश किया गया है, लेकिन भारी घाटे के आंकड़ों ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Amazon ने अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी को पूरी तरह बदलते हुए अब भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। कंपनी का मकसद प्राइम मेंबरशिप को बड़े मेट्रो शहरों से बाहर एक जरूरी सर्विस के तौर पर स्थापित करना है। इस विस्तार को सपोर्ट करने के लिए 2026 में ₹2,800 करोड़ का बड़ा निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जा रहा है। इसमें 20 नए फुलफिलमेंट सेंटर और 150 लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन शामिल हैं, ताकि सर्विस को और तेज बनाया जा सके।

पहुंच के लिए भारी निवेश

Amazon का मुख्य लक्ष्य लोगों को शॉपिंग की आदत डालना है। 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' से पहले, कंपनी ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी डिस्काउंट और कैशबैक के जरिए उन्हें लॉयल सब्सक्राइबर में बदलने की कोशिश कर रही है। 400 से ज्यादा शहरों में 1.6 लाख लोगों का वर्कफोर्स तैनात करना कंपनी के इस बड़े दांव को दिखाता है, जहां वे केवल कीमत नहीं बल्कि ब्रांड लॉयल्टी पर जोर दे रहे हैं।

घाटे का गणित

यह विस्तार जितना आकर्षक दिख रहा है, इसका खर्च भी उतना ही ज्यादा है। रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद Amazon की भारतीय सब्सिडियरीज फिलहाल नुकसान में हैं। FY26 में Amazon Retail India ने ₹3,080 करोड़ का रेवेन्यू तो दर्ज किया, लेकिन कंपनी को ₹1,158 करोड़ का नेट लॉस हुआ। वहीं, Amazon Pay India का रेवेन्यू ₹2,484.4 करोड़ रहा, जबकि नेट लॉस ₹1,148.5 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया।

ग्लोबल स्तर पर भी Amazon का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 तक $220 बिलियन (AI और लॉजिस्टिक्स सहित) रहने का अनुमान है, जो कि एनालिस्ट्स के बीच चिंता का विषय बना हुआ है।

आगे क्या होगा?

कंपनी की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ये नए टियर-2 और टियर-3 ग्राहक बिना भारी डिस्काउंट के भी प्रॉफिटेबल बन पाएंगे या नहीं। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि नए फुलफिलमेंट सेंटर से डिलीवरी कॉस्ट में कितनी कमी आती है। अगर भविष्य में कंपनी के रिटेल और पेमेंट बिजनेस का घाटा कम होता है, तभी इस निवेश को लॉन्ग टर्म में सफल माना जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.