Alka India ने फूड सेक्टर में बढ़ाए कदम, 7 कंपनियों का किया अधिग्रहण
Alka India Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 7 प्राइवेट कंपनियों - Mementos Foods, Satyarath Foods, Kostub Foods, Neurich Nutrifoods, Phycus Nutrifoods, Philimont Nutrifoods, और Grefos International - में 100% हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। इन एक्विजिशन (Acquisition) को 27 फरवरी 2026 को शेयर परचेज़ एग्रीमेंट (Share Purchase Agreements) के ज़रिए अंतिम रूप दिया गया है। इस डील के तहत, Alka India इन कंपनियों की पूरी हिस्सेदारी को शेयर स्वैप (Share Swap) के ज़रिए अधिग्रहित करेगी और ये कंपनियां कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां (Wholly-owned subsidiaries) बन जाएंगी।
डील की बारीकियां: शेयर स्वैप और अलॉटमेंट
यह अधिग्रहण प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) के ज़रिए होगा, जिसमें Alka India अपने इक्विटी शेयर्स (Equity Shares) इश्यू करेगी। उदाहरण के लिए, Mementos Foods के अधिग्रहण के लिए 85,00,000 इक्विटी शेयर (जिनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है) के बदले Alka India 2,55,00,000 इक्विटी शेयर (जिनकी फेस वैल्यू ₹1 प्रति शेयर है) जारी करेगी। इसी तरह, Satyarath Foods के लिए 32,27,070 इक्विटी शेयर (₹10 फेस वैल्यू) के बदले 64,54,140 इक्विटी शेयर (₹1 फेस वैल्यू) और Kostub Foods के लिए 61,33,250 इक्विटी शेयर (₹10 फेस वैल्यू) के बदले 3,06,66,250 इक्विटी शेयर (₹1 फेस वैल्यू) जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया फाइनेंशियल ईयर 2025–2026 के दौरान पूरी होने की उम्मीद है।
क्यों है यह डील अहम?
यह Alka India के लिए एक बड़ा स्ट्रैटेजिक (Strategic) कदम है, क्योंकि कंपनी अभी तक मुख्य रूप से पेपर और केमिकल बिज़नेस में ही सक्रिय थी। इस एक्विजिशन (Acquisition) से कंपनी फूड और एग्रो-प्रोडक्ट्स सेगमेंट में अपनी मौजूदगी को मज़बूत करना चाहती है। इसका मकसद इन नई अधिग्रहित कंपनियों के स्थापित डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (Distribution Network) और बाज़ार में अच्छी पकड़ का फायदा उठाना है, जिससे कंपनी के रेवेन्यू स्ट्रीम (Revenue Streams) और ग्रोथ के नए रास्ते खुल सकें।
आगे क्या देखना होगा?
इस डील को पूरा करने में मुख्य जोखिम रेगुलेटरी और स्टेटुटरी अप्रूवल (Regulatory and Statutory Approvals) का मिलना है। शेयर स्वैप के लिए इक्विटी शेयर्स की प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट को स्टॉक एक्सचेंज, SEBI और कंपनी के सदस्यों से भी मंजूरी मिलनी बाकी है। किसी भी तरह की देरी या रिजेक्शन से अधिग्रहण योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या ट्रैक करें?
- शेयर स्वैप के लिए ज़रूरी रेगुलेटरी और स्टेटुटरी अप्रूवल मिलने की दिशा में प्रगति।
- शेयर स्वैप के लिए स्टॉक एक्सचेंज और SEBI से मिलने वाली इन-प्रिंसिपल अप्रूवल की समय-सीमा।
- सात सब्सिडियरी कंपनियों को Alka India के बिज़नेस में इंटीग्रेट (Integrate) करने की इफेक्टिव डेट।
- मैनेजमेंट की नई अधिग्रहित फूड बिज़नेस को स्केल-अप (Scale-up) करने की स्ट्रेटेजी।