दिल्ली हाई कोर्ट ने Adani Wilmar की सब्सिडियरी AWL Agri Business और FSSAI के बीच चल रहे कानूनी विवाद में रेगुलेटर की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। 'Fortune' सोया ऑयल की लेबलिंग को लेकर जारी इस विवाद के कारण डिस्ट्रिब्यूटर्स ने ऑर्डर होल्ड करना शुरू कर दिया है, जिससे कंपनी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
कोर्ट का क्या है रुख?
दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 'Fortune Soya Health Refined Soyabean Oil' की लेबलिंग से जुड़े मामले की सुनवाई करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। 1 सितंबर 2026 को अदालत ने FSSAI की उस दलील को ठुकरा दिया, जिसमें रेगुलेटर ने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) पर सवाल उठाए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को तय की गई है।
विवाद की जड़ क्या है?
मामला सोया ऑयल के पैकेट पर छपे दावों से जुड़ा है, जिनमें '100% Veg' और 'Cholesterol Free' जैसे टैग्स का इस्तेमाल किया गया है। जुलाई 2026 में FSSAI द्वारा जारी 'Show Cause Notice' के बाद कंपनी इसे गलत मान रही है। इस रेगुलेटरी अनिश्चितता के कारण, कई थोक और खुदरा विक्रेताओं ने नए ऑर्डर लेने बंद कर दिए हैं और वे मौजूदा स्टॉक वापस करने की बात कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा जुर्माने का डर है।
निवेशकों के लिए चिंता की बात
खाद्य तेल का कारोबार 'High-Volume, Low-Margin' मॉडल पर काम करता है, जहां सप्लाई चेन की निरंतरता बहुत अहम है। Adani Wilmar ने हाल ही में अपने चौथी तिमाही के नतीजों में ₹293.06 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो सालाना आधार पर 53.7% की भारी बढ़त है। ऐसे में 'Fortune' ब्रांड की ब्रांड वैल्यू और सेल्स वॉल्यूम पर असर पड़ना कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
हालांकि यह अदालत का एक प्रक्रियात्मक (Procedural) फैसला है, लेकिन बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मैनेजमेंट इस रेगुलेटरी संकट को जल्द सुलझा पाएगा या इसका असर कंपनी की सेल्स पर दिखेगा।
