AWL Agri का 2027 तक ₹10,000 करोड़ का फूड रेवेन्यू लक्ष्य, एडिबल ऑयल से दूरी

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AWL Agri का 2027 तक ₹10,000 करोड़ का फूड रेवेन्यू लक्ष्य, एडिबल ऑयल से दूरी
Overview

AWL Agri बिजनेस अपनी आय का बड़ा हिस्सा एडिबल ऑयल से हटाकर फूड प्रोडक्ट्स पर केंद्रित कर रहा है, जिसका लक्ष्य मार्च 2027 तक ₹10,000 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है। यह कदम मार्जिन बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए उठाया जा रहा है, जिसमें कंपनी अपनी मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रांड पहचान का लाभ उठाएगी।

AWL Agri बिजनेस, जिसे पहले अडाणी विल्मर के नाम से जाना जाता था, एडिबल ऑयल बाज़ार की अस्थिरता पर निर्भरता को काफी हद तक कम करने के लिए खुद को व्यापक खाद्य क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में रणनीतिक रूप से स्थापित कर रहा है। कंपनी वर्तमान में अपने फॉर्च्यून ब्रांड के तहत खाद्य उत्पादों से 18-19% रेवेन्यू प्राप्त करती है, जिसे वह बढ़ाकर 30-35% करने का इरादा रखती है। इस रणनीतिक पुनर्गठन का लक्ष्य मार्च 2027 तक खाद्य व्यवसाय के रेवेन्यू को वर्तमान लगभग ₹6,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹10,000 करोड़ करना है। कंपनी के नेतृत्व का कहना है कि खाद्य क्षेत्र में विस्तार केवल पैमाने के लिए नहीं है, बल्कि लाभप्रदता और व्यावसायिक स्थिरता में सुधार के लिए भी है। खाद्य उत्पादों में आम तौर पर एडिबल ऑयल (जो आमतौर पर 12-13% पर रहता है) की तुलना में बेहतर सकल मार्जिन (25% तक) होता है। इसी तरह, खाद्य वस्तुओं के लिए EBITDA मार्जिन 8-9% तक पहुंच सकता है, जो एडिबल ऑयल सेगमेंट में देखे जाने वाले 4-4.5% से काफी अधिक है। इस बदलाव को कमोडिटी तेल की कीमतों की अंतर्निहित अस्थिरता से व्यवसाय को डी-रिस्क करने की एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.