AI Search का बढ़ता दबदबा: पारंपरिक सर्च इंजन के दिन लदे, रिटेल मार्केट में अब बड़ा बदलाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI Search का बढ़ता दबदबा: पारंपरिक सर्च इंजन के दिन लदे, रिटेल मार्केट में अब बड़ा बदलाव

नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब एक-तिहाई ग्राहक खरीदारी के फैसले के लिए AI पर निर्भर हैं और सर्च इंजन को छोड़ रहे हैं। भारतीय रिटेलर्स के लिए अब AI-फ्रेंडली डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि प्रोडक्ट की विजिबिलिटी और प्राइसिंग अब सीधे AI-ड्रिवन एल्गोरिदम पर निर्भर है।

पारंपरिक सर्च इंजन की जगह तेजी से AI-पावर्ड टूल्स ले रहे हैं क्योंकि ग्राहक अब अधिक सटीक और सीधे खरीदारी के तरीके खोज रहे हैं। ताजा आंकड़े बताते हैं कि AI का इस्तेमाल करने वाले ग्राहक पारंपरिक सर्च के मुकाबले 3.2 गुना अधिक AI सिस्टम को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह डिजिटल रिटेल के उस पुराने दौर को बदल रहा है जहां सर्च इंजन प्रोडक्ट डिस्कवरी का शुरुआती बिंदु हुआ करता था।

भारतीय रिटेलर्स के लिए चुनौती और अवसर

भारत में Reliance Retail, Tata Digital और Blinkit या Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब अपने इंटरनल डेटा इकोसिस्टम को AI रिट्रीवल के लिए ऑप्टिमाइज़ करना होगा। पारंपरिक SEO के विपरीत, AI-ड्रिवन सर्च अब सटीक प्रोडक्ट जानकारी, रियल-टाइम इन्वेंटरी लेवल और डायनामिक प्राइसिंग डेटा पर टिकी है। यदि रिटेलर्स का बैकएंड सिस्टम इन AI एजेंट्स को सही डेटा नहीं भेजेगा, तो उनके प्रोडक्ट्स 'AI-फर्स्ट' ग्राहकों के सामने कभी नहीं दिखेंगे।

प्लेटफॉर्म एडवांटेज और मार्जिन रिस्क

हालांकि फिलहाल डिस्कवरी के मामले में स्टैंडअलोन AI प्लेटफॉर्म्स आगे हैं, लेकिन रिटेल-नेटिव AI असिस्टेंट ट्रांजेक्शन पूरा करने में ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं। करीब 15% यूजर्स अब रिटेल-नेटिव असिस्टेंट्स को पसंद कर रहे हैं क्योंकि वे रियल-टाइम लॉजिस्टिक्स और पेमेंट सिस्टम से जुड़े होते हैं। भविष्य में, अगर AI एजेंट्स किसी खास कंपनी को प्राथमिकता देने की मांग करते हैं, तो रिटेलर्स के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, साथ ही डेटा इंजीनियरिंग पर खर्च भी बढ़ेगा।

डेटा सुरक्षा और DPDP एक्ट

करीब 80% ग्राहक समय बचाने के लिए AI का रुख कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय कंपनियों के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत यूजर डेटा को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती है। जो कंपनियां ऑटोनॉमस शॉपिंग फीचर्स को स्केल करने के साथ-साथ डेटा सुरक्षा में चूक करेंगी, उन्हें रेगुलेटरी और साख (reputation) से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.