Multi Commodity Exchange (MCX) पर Zinc के दाम में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। ग्लोबल मार्केट में इन्वेंट्री घटने और प्रोडक्शन से जुड़ी दिक्कतों के चलते भाव तेजी के साथ ट्रेड कर रहे हैं।
भारतीय बाजार में Zinc के दाम एक मजबूत अपवर्ड ट्रेंड दिखा रहे हैं और यह ₹415 प्रति किलोग्राम के स्तर के आसपास बना हुआ है। इससे पहले मेटल ने ₹395 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल को आसानी से पार कर लिया था। यह तेजी ग्लोबल स्तर पर सप्लाई चेन की बाधाओं की वजह से देखी जा रही है।
तेजी की मुख्य वजहें
इस प्राइस राली का सबसे बड़ा कारण London Metal Exchange (LME) पर जिंक की इन्वेंट्री में आई भारी गिरावट है। बाजार में मेटल की उपलब्धता कम हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। इसके अलावा, चीन के प्रमुख माइनिंग और स्मेल्टिंग हब में परिचालन संबंधी दिक्कतें आ रही हैं। Glencore और Boliden जैसे ग्लोबल प्रोड्यूसर्स के सामने भी आउटपुट बढ़ाने की चुनौती है, जिससे सप्लाई लगातार टाइट बनी हुई है।
मार्केट का सेंटीमेंट
सप्लाई भले ही कम हो, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अमेरिका व यूरोप के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार के कारण डिमांड बनी हुई है। घरेलू बाजार में इसका असर Hindustan Zinc जैसी कंपनियों के शेयरों पर भी दिख रहा है, जो कमोडिटी मार्केट की मजबूती के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं।
क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?
तेजी के बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स कुछ जोखिमों को लेकर सचेत हैं। अगर कीमतें बहुत ज्यादा ऊपर बनी रहीं, तो एंड-यूजर डिमांड पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, US डॉलर की मजबूती और माइनिंग इलाकों में खराब मौसम (जैसे बाढ़) जैसी स्थितियां कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती हैं। आने वाले समय में LME की इन्वेंट्री रिपोर्ट और स्मेल्टर प्रोडक्शन डेटा पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, जो तय करेंगे कि यह तेजी कितनी टिकाऊ है।
