Zinc Futures: ₹395 पर बड़ा रेजिस्टेंस, क्या आने वाली है गिरावट?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Zinc Futures: ₹395 पर बड़ा रेजिस्टेंस, क्या आने वाली है गिरावट?

MCX पर जिंक फ्यूचर्स ₹393 प्रति किलो के करीब कारोबार कर रहा है और ₹395 के अहम रेजिस्टेंस लेवल के पास पहुंच गया है। दुनिया भर के बड़े माइनर्स से सप्लाई में आ रही कमी के चलते लंबे समय में मजबूती बनी हुई है, लेकिन टेक्निकल चार्ट्स इशारा कर रहे हैं कि कीमत में ₹382-₹384 के लेवल तक गिरावट आ सकती है।

जिंक की चाल: ₹395 का बैरियर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जिंक फ्यूचर्स जून के आखिरी हफ्ते से लगातार मजबूती दिखा रहा है। ₹350 के सपोर्ट लेवल से चढ़कर, 6 अगस्त 2026 तक अगस्त का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट करीब ₹393 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

हालांकि, इस जोरदार परफॉर्मेंस के बावजूद, यह कॉन्ट्रैक्ट अब एक महत्वपूर्ण ट्रेंडलाइन रेजिस्टेंस लेवल ₹395 के करीब पहुंच गया है। टेक्निकल एनालिसिस में, रेजिस्टेंस लेवल वह प्राइस पॉइंट होता है जहां खरीदारों की तेजी अक्सर रुक जाती है, और इसके बाद कीमत में कंसॉलिडेशन (ठहराव) या मामूली गिरावट देखने को मिलती है।

क्या ₹395 का लेवल टूटेगा?

बाजार के खिलाड़ी इस लेवल पर कड़ी नजर रख रहे हैं। अगर कॉन्ट्रैक्ट ₹395 के ऊपर टिकने में कामयाब नहीं होता है, तो इसमें मामूली गिरावट आ सकती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि ऐसी स्थिति में, कीमत वापस ₹382-₹384 के सपोर्ट जोन की ओर जा सकती है। वहीं, ₹382 और फिर ₹380 से नीचे का ब्रेक ₹380 के सपोर्ट लेवल के नीचे एक स्थायी गिरावट को कमजोर पड़ने का संकेत देगा। हालांकि, कई जानकारों का मानना है कि मौजूदा अपट्रेंड की मजबूती को देखते हुए ₹380 के सपोर्ट लेवल से नीचे की गिरावट की संभावना कम है।

कीमत को कौन से फैक्टर प्रभावित कर रहे हैं?

जिंक की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे सप्लाई की कमी एक बड़ा कारण है। 2026 की पहली छमाही में ग्लोबल आउटपुट में दिक्कतें आई हैं, जिसमें Glencore, Boliden और MMG जैसी बड़ी माइनिंग कंपनियों ने उत्पादन में गिरावट की रिपोर्ट दी है। इसके अलावा, चीन में स्मेल्टिंग फैसिलिटी में मेंटेनेंस के चलते भी सप्लाई टाइट है, जिससे मार्केट प्रोडक्शन की खबरों के प्रति सेंसिटिव बना हुआ है।

सप्लाई की कमी कीमतों को सपोर्ट दे रही है, लेकिन निवेशकों को उन जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए जो सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें USD/INR एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड में बदलाव शामिल हैं, जो सीधे कमोडिटी की कीमतों पर असर डालते हैं। इसके अलावा, लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के वेयरहाउस में जिंक के स्टॉक में कोई भी अप्रत्याशित या तेज बढ़ोतरी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स पर दबाव डाल सकती है।

₹395 के बैरियर के पास संभावित गिरावट के कारण, कुछ ट्रेडर्स इन लेवल्स पर प्रॉफिट-बुकिंग कर सकते हैं और नई पोजीशन लेने से पहले प्राइस स्टेबिलिटी का इंतजार करना पसंद कर सकते हैं। आने वाले सत्रों में सबसे अहम यह देखना होगा कि क्या कॉन्ट्रैक्ट ₹395 के लेवल को निर्णायक रूप से तोड़ पाता है या फिर टेक्निकल रेजिस्टेंस के चलते यह निचले सपोर्ट लेवल की ओर जाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.