World Gold Council का बड़ा प्लान: भारत में सोने का सेक्टर होगा मालामाल! 'स्वर्णिम उड़ान 2047' से बदलेगी तस्वीर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
World Gold Council का बड़ा प्लान: भारत में सोने का सेक्टर होगा मालामाल! 'स्वर्णिम उड़ान 2047' से बदलेगी तस्वीर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने भारत के सोने के सेक्टर के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप 'स्वर्णिम उड़ान 2047' पेश किया है। इसका लक्ष्य सोने को सिर्फ बचत का जरिया बनाने के बजाय देश की आर्थिक ग्रोथ का इंजन बनाना है। इस प्लान में देश में सोने की माइनिंग बढ़ाना, ज्वेलरी एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना और घरों में रखे सोने को औपचारिक रूप से इस्तेमाल में लाना शामिल है। हालांकि, यह एक लंबी अवधि की रणनीति है, लेकिन अभी निवेशक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गोल्ड लोन देने वाली NBFCs पर इसके असर पर नजर रख रहे हैं।

सोने को बनाएंगे आर्थिक विकास का हथियार!

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने 'स्वर्णिम उड़ान 2047' नाम से एक खास रोडमैप जारी किया है। इसका मकसद आने वाले दो दशकों में सोने को भारत के आर्थिक विकास का एक अहम हिस्सा बनाना है। WGC चाहता है कि सोना सिर्फ घरों की तिजोरियों में पड़े रहने वाली चीज न रहकर, 2047 तक देश के औद्योगिक और वित्तीय विकास में सक्रिय भूमिका निभाए।

रोडमैप के मुख्य स्तंभ:

भारत सोने के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है, इस निर्भरता को कम करने के लिए इस रोडमैप में कुछ बड़े बदलावों का सुझाव दिया गया है। एक बड़ा प्रस्ताव यह है कि देश में सोने की माइनिंग को बढ़ाकर कुल मांग का 10% से 20% तक पूरा किया जाए। अभी भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना बाहर से आयात करता है। WGC का कहना है कि स्थानीय उत्पादन बढ़ाने से नौकरियां पैदा होंगी और आयात पर खर्च होने वाला पैसा देश में ही रहेगा।

ज्वेलरी एक्सपोर्ट पर भी खास ध्यान दिया गया है। WGC का कहना है कि महंगे और ब्रांडेड ज्वेलरी के उत्पादन को बढ़ावा देकर एक्सपोर्ट बढ़ाया जा सकता है। अभी भारत फिनिश्ड ज्वेलरी का एक्सपोर्ट बहुत कम करता है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक सही प्रोत्साहन मिलने पर यह एक्सपोर्ट अगले एक दशक में काफी बढ़ सकता है।

भारतीय घरों में रखे भारी मात्रा में सोने को संभालने के लिए, रिपोर्ट में 'फाइनेंशियललाइजेशन' पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि लोगों को अपना फिजिकल सोना गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम या इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स जैसे औपचारिक सिस्टम में जमा करने या निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे बेकार पड़े सोने की वैल्यू का पता चलेगा और उसे अर्थव्यवस्था के लिए पूंजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पॉलिसी और टेक्नोलॉजी का मेल

WGC ने 'नेशनल गोल्ड बोर्ड' और 'गोल्ड इनोवेशन सेंटर' बनाने की सिफारिश की है। यह बोर्ड नीतियों के समन्वय के लिए एक सिंगल पॉइंट का काम करेगा, जो अभी अलग-अलग मंत्रालयों में बिखरी हुई हैं। इसका लक्ष्य नियमों को आसान बनाना, बुलियन बैंकिंग को मैनेज करना और इनोवेशन को बढ़ावा देना है, जिसमें एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक सेक्टरों में सोने के उपयोग का विस्तार भी शामिल है।

मार्केट का मौजूदा हाल और रिस्क

हालांकि यह रोडमैप 2047 तक के लिए है, लेकिन सोने का मौजूदा मार्केट 'वोलेटाइल' (Volatile) बना हुआ है। 14 अगस्त 2026 तक, भारत में 24K सोने का भाव ₹1,53,600 प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो हाल ही में दो महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था। कीमतों में यह उतार-चढ़ाव काफी हद तक वैश्विक कारणों से है, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं।

कीमतों का यह उतार-चढ़ाव वित्तीय सेक्टर, खासकर NBFCs के लिए एक खास जोखिम पैदा करता है जो गोल्ड-बैक्ड लोन देते हैं। जब सोने की कीमतें तेजी से बदलती हैं, तो इन लेंडर्स के पास रखे कोलैटरल (गिरवी रखे सोने) का मूल्य भी तेजी से बदल जाता है। इससे लेंडर्स के लिए 'मार्जिन कॉल' की स्थिति बन सकती है, जहां उधारकर्ताओं को लोन की वैल्यू बनाए रखने के लिए और कैश या सोना देना पड़ सकता है, या अगर सोने की कीमत तेजी से गिरती है तो डिफॉल्ट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, लगातार ऊंची बनी हुई सोने की कीमतों ने भारत में 'कोर इन्फ्लेशन' (Core Inflation) को भी बढ़ाया है, जो एक ऐसा फैक्टर है जिस पर निवेशक बारीकी से नजर रखते हैं क्योंकि यह व्यापक मौद्रिक नीति और उपभोक्ता खर्च की क्षमता को प्रभावित करता है।

अब निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि सरकार नेशनल गोल्ड बोर्ड के प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देती है और क्या घरेलू माइनिंग और ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कोई खास पॉलिसी इंसेंटिव पेश किए जाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.